West Bengal Politics : तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों भारी आंतरिक कलह और राजनीतिक उठापटक के दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर पनपे इस संकट को लेकर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी बेहद आक्रामक नजर आ रही हैं। शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को फेसबुक लाइव के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने बागी नेताओं पर जमकर निशाना साधा और उन्हें खुली चुनौती दी। ममता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इन नेताओं में साहस है, तो वे भाजपा की कठपुतली बनकर पार्टी को भीतर से कमजोर करने की साजिश रचने के बजाय, औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होकर उनका सीधा मुकाबला करें। उन्होंने इस व्यवहार को राजनीतिक अवसरवाद और विश्वासघात करार दिया।

पार्टी की मजबूती और नेतृत्व का बचाव
फेसबुक लाइव के दौरान ममता बनर्जी काफी भावुक दिखीं, लेकिन उनका इरादा अडिग था। उन्होंने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया कि कुछ नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने से टीएमसी की नींव हिलने वाली नहीं है। उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा कि व्यक्ति आते-जाते रहते हैं, लेकिन एक राजनीतिक संस्था कभी खत्म नहीं होती। ममता ने उन बागी नेताओं को ‘एहसान फरामोश’ करार दिया, जिन्होंने पिछले 15 वर्षों तक टीएमसी के टिकट पर सांसद, विधायक और मंत्री रहकर सत्ता का सुख भोगा। उन्होंने सवाल किया कि यदि इन नेताओं को पार्टी की कार्यप्रणाली से कोई वास्तविक शिकायत थी, तो सत्ता में रहने के दौरान या चुनाव से पहले उन्होंने यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया?

संगठनात्मक बदलाव और पार्टी की कमान
संकट के समय पार्टी को एकजुट रखने के लिए ममता बनर्जी ने बड़े संगठनात्मक बदलावों का ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि जब तक वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, तब तक पार्टी प्रमुख की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार भी संभालेंगी। इसके अलावा, उन्होंने कुणाल घोष और मदन मित्रा को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया है, ताकि जमीनी स्तर पर पार्टी को फिर से सक्रिय किया जा सके। ममता ने चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे को भी महज एक औपचारिक घटना बताया, यह कहते हुए कि उनका परिवार पहले ही बागी खेमे से जुड़ा हुआ था, इसलिए उनके जाने से संगठन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
चुनाव चिह्न और पार्टी कार्यालय पर दावों की हकीकत
बागी गुट द्वारा टीएमसी के ऐतिहासिक ‘दो फूल’ चुनाव चिह्न पर दावा करने को लेकर ममता ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे षड्यंत्रों की कोई परवाह नहीं है, क्योंकि बंगाल की जागरूक जनता इस पूरे खेल को समझती है। उन्होंने पार्टी मुख्यालय पर कब्जे की कोशिश और दफ्तर में ताले लगाने की घटना की भी कड़ी निंदा की। ममता ने स्पष्ट किया कि पार्टी कार्यालय कानूनी रूप से वैध किराए के समझौते के तहत अक्टूबर 2027 तक उनके पास है और वे नियमित रूप से किराया चुका रही हैं। उन्होंने बागी गुट पर तंज कसते हुए कहा कि वे इमारतों पर ताले तो लगा सकते हैं, लेकिन लोगों के दिलों से उन्हें बाहर नहीं निकाल सकते।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भविष्य की दिशा
अपने संबोधन के दौरान ममता ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का नाम लिए बिना उन पर भी निशाना साधा और उनके पुराने संबंधों को याद किया। वहीं, ममता के इन आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के नेता ‘कट मनी’ की राजनीति के खात्मे के कारण पार्टी छोड़ रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि अब तक यही भ्रष्ट व्यवस्था पार्टी को जोड़े रखने का आधार थी। बहरहाल, ममता बनर्जी का यह रुख साफ करता है कि वे झुकने को तैयार नहीं हैं और आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में टकराव और बढ़ने के संकेत हैं।
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