ECI Update: भारत के कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अपने चरम पर है। चुनावी शोर जितना जमीन पर सुनाई दे रहा है, उससे कहीं ज्यादा हलचल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देखी जा रही है। इस माहौल में फर्जी खबरों और भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आदर्श आचार संहिता (MCC) का कड़ाई से पालन करें। आयोग का मुख्य उद्देश्य चुनावों के दौरान डिजिटल स्पेस में नैतिकता और पारदर्शिता बनाए रखना है।

एआई कंटेंट पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 3 घंटे के भीतर होगी कार्रवाई
आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने एआई-जनरेटेड (AI-generated) सामग्री के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने साफ कहा है कि अगर सोशल मीडिया पर कोई भी भ्रामक या हेरफेर की गई एआई सामग्री (Deepfake) पाई जाती है, तो उसे रिपोर्ट होने के मात्र 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, यदि कोई राजनीतिक दल या उम्मीदवार चुनाव प्रचार के लिए एआई का उपयोग करता है, तो उसे स्पष्ट रूप से ‘डिस्क्लेमर’ देना होगा कि यह सामग्री कृत्रिम रूप से निर्मित है। इसका स्रोत बताना भी अनिवार्य है ताकि मतदाताओं के बीच विश्वास बना रहे।
राज्यों में कड़ी चौकसी: 11 हजार से ज्यादा यूआरएल पर गिरी गाज
असम, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी राज्यों में आईटी नोडल अधिकारियों की टीम चौबीसों घंटे सक्रिय है। आयोग उन पोस्टों की बारीकी से निगरानी कर रहा है जो कानून-व्यवस्था बिगाड़ने, मतदान मशीनरी (EVM) के खिलाफ झूठ फैलाने या आचार संहिता का उल्लंघन करने की क्षमता रखते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च 2026 को चुनाव घोषणा के बाद से अब तक 11,000 से अधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और यूआरएल की पहचान कर उन पर कार्रवाई की गई है। इनमें एफआईआर दर्ज करने से लेकर कंटेंट हटाने तक की कार्रवाई शामिल है।
‘साइलेंस पीरियड’ का पालन: 48 घंटे पहले थम जाएगा डिजिटल प्रचार
चुनाव आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 की याद दिलाते हुए कहा कि मतदान समाप्त होने से पहले के 48 घंटों (साइलेंस पीरियड) के दौरान किसी भी प्रकार की चुनावी सामग्री का प्रदर्शन वर्जित रहेगा। यह नियम टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी समान रूप से लागू होगा। इस अवधि के दौरान किसी भी उम्मीदवार या दल द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने वाली कोई भी नई पोस्ट या विज्ञापन साझा करना कानूनी अपराध माना जाएगा।
सी-विजिल (C-Vigil) ऐप का कमाल: 100 मिनट में शिकायतों का समाधान
चुनावी गड़बड़ियों को रोकने में तकनीक का सकारात्मक उपयोग भी देखा जा रहा है। नागरिक और राजनीतिक दल आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट ‘सी-विजिल’ ऐप के माध्यम से कर रहे हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच इस ऐप पर कुल 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गईं। आयोग की कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से 96.01% शिकायतों का निपटारा निर्धारित 100 मिनट की समय सीमा के भीतर कर दिया गया। यह डिजिटल सिस्टम चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना रहा है।
निष्पक्ष चुनाव के लिए पारदर्शी डिजिटल वातावरण
निर्वाचन आयोग की यह सक्रियता दर्शाती है कि वह बदलते दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। सोशल मीडिया और एआई के युग में मतदाताओं को गुमराह होने से बचाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सख्त नियमों और त्वरित कार्रवाई के जरिए आयोग लोकतंत्र की शुचिता बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। सभी हितधारकों को सलाह दी गई है कि वे जिम्मेदारी के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें अन्यथा उन्हें गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

















