Pratappur News : वन मंडल सूरजपुर के वन परिक्षेत्र घुई में फिर से एक ग्रामीण युवक को हाथी के हमले में प्राण गंवाने पड़े हैं। इससे पूर्व भी 14 जुलाई को वन परिक्षेत्र घुई में हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हुई थी। और अब फिर से एक ग्रामीण की जान चली गई। घटना बुधवार तड़के की है।

घुई के करचोला गांव में रहने वाले बलदेव सिंह पिता रामलाल 35 वर्ष ने घर से थोड़ी दूरी पर स्थित अपने खेत में भैंसों के लिए एक झाला बना रखा था। घर में जगह की कमी थी इसलिए वह अपनी भैंसों को झाले में ही बांध कर रखता था। दिन में वह वन विभाग की बड़वार स्थित नर्सरी में काम करता था तथा भैंसों की रखवाली के लिए रोज रात को झाले में सोने चला जाता था। मंगलवार को भी वह घर से भोजन कर झाले में सोने चला गया था। इसी बीच बुधवार तड़के वहां एक हाथी आ धमका।

गहरी नींद में अपनी खटिया पर सो रहे बलदेव को हाथी के आने की भनक नहीं लगी। हाथी ने उसे अपनी चपेट में लिया और सूंड़ में लपेटकर खटिया सहित जमीन में पटक दिया। जमीन पर पटकाने के बाद वह बचने के लिए हाथ पैर मार ही रहा था कि तभी हाथी ने उसे अपने पैरों से भी कुचल दिया। जिसके कारण घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। हाथी ने उसकी खटिया और वहां रखे बर्तनों के भी टुकड़े टुकड़े कर दिए।
घटना की जानकारी मिलने पर घुई के वनकर्मी क्षतविक्षत शव का पोस्टमार्टम कराने स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर लेकर पहुंचे जहां पोस्टमार्टम पश्चात शव स्वजनों को सौंपते हुए पच्चीस हजार की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की।
एक घर को भी किया क्षतिग्रस्त
वन परिक्षेत्र घुई के करचोला में ग्रामीण की जान लेने के बाद हाथी ने वहीं पर स्थित एक अन्य ग्रामीण बुधराम देवांगन पिता हरिकेश्वर के घर पर भी हमला कर दिया। भनक लगते ही बुधराम व उसके स्वजन किसी तरह से जान बचाते हुए घर से बाहर निकले और शोर मचाया। शोर सुनकर बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और शोर मचाते हुए हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास करने लगे पर तब तक हाथी घर को दो तीन जगहों से क्षतिग्रस्त कर चुका था। काफी प्रयास के बाद हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा गया। इधर हाथी के हमले में घर क्षतिग्रस्त होने के साथ ही घर में रखी खाद्य सामग्री व कई अन्य वस्तुएं भी नष्ट हो गईं।
खानापूर्ति करने आते हैं रेंजर
बता दें कि वन परिक्षेत्र घुई में ग्रामीण बस्तियों की ओर हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। वर्तमान में यहां का प्रभार बिहारपुर के रेंजर मेवालाल पटेल संभाल रहे हैं। बिहारपुर से घुई की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। इसलिए रेंजर मेवालाल कभी कभार ही वन परिक्षेत्र घुई आते हैं और खानापूर्ति कर लौट जाते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारी घुई के डिप्टी रेंजर सुरेन्द्र सिंह को दे रखी है पर वे भी घुई में न रहते हुए प्रतापपुर स्थित अपने घर से आना जाना करते हैं। जिम्मेदारों के इस लापरवाही भरे रवैए के कारण वन परिक्षेत्र घुई बे-लगाम स्थिति में चल रहा है। इस बे-लगामी के कारण ही ग्रामीणों को हाथियों की आवाजाही की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को अपने जानमाल के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ता है।
ग्रामीण की मौत के बाद भी रेंजर का अता-पता नहीं
इधर हाथी के हमले में वन परिक्षेत्र घुई अंतर्गत करचोला गांव में हुई ग्रामीण की मौत के बाद ग्रामीण घुई के रेंजर मेवालाल पटेल के ऊपर क्षेत्र से लापता रहने का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने आज तक रेंजर को नहीं देखा है। यहां तक कि घटनास्थल पर भी केवल घुई के वनकर्मी ही आए थे रेंजर नहीं। जब शव को पोस्टमार्टम कराने प्रतापपुर लाया गया तो वहां भी रेंजर कहीं दिखाई नहीं दिए। इस संबंध में जब रेंजर मेवालाल पटेल को फोन लगाया गया तो उनका फोन बंद मिला।











