End of Kaliyuga Signs: हिंदू धर्म के अनुसार, सृष्टि का समय चक्र चार युगों में विभाजित है—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। वर्तमान में हम कलियुग में हैं, जिसकी शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद मानी जाती है। सभी युगों की तरह कलियुग का भी एक अंत होगा, और इस अंत से पहले मानव समाज में कुछ विशेष लक्षण दिखाई देने लगेंगे।

श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु पुराण, भागवत पुराण और रामचरितमानस जैसे ग्रंथों में कलियुग के अंत के संकेतों का विस्तार से उल्लेख है। आइए जानते हैं कि कलियुग के अंत में मनुष्यों में कौन-कौन से 10 लक्षण प्रमुख रूप से दिखने लगेंगे।

कलियुग के अंत में मनुष्यों में दिखेंगे ये 10 लक्षण
धर्म का पतन:
लोग धर्म के मार्ग से भटक जाएंगे और अधार्मिक कृत्यों को ही सामान्य मानने लगेंगे।
सत्य का अभाव:
समाज में झूठ, छल-कपट और धोखाधड़ी इतनी बढ़ जाएगी कि सत्य बोलने वाले गिने-चुने रह जाएंगे।
पवित्रता की कमी:
शारीरिक, मानसिक और सामाजिक पवित्रता का ह्रास होगा। नैतिक मूल्यों का महत्व नहीं रह जाएगा।
क्षमा का लोप:
बदले की भावना प्रबल होगी। लोग क्षमा करना भूल जाएंगे और द्वेष बनाए रखेंगे।
दयाभाव में गिरावट:
परोपकार, सहानुभूति और करुणा जैसी भावनाएं लोगों के व्यवहार से विलुप्त होने लगेंगी।
आयु में कमी:
मनुष्यों की औसत आयु घटकर 20 से 30 वर्ष के बीच रह जाएगी। बाल्यावस्था और युवावस्था के बीच ही मृत्यु हो सकती है।
बल का ह्रास:
लोगों में शारीरिक और मानसिक शक्ति का अभाव होगा। रोग और कमजोरी आम बात बन जाएगी।
स्मरण शक्ति की हानि:
मनुष्य छोटी-छोटी बातें भी भूलने लगेंगे। मानसिक क्षमता कमजोर हो जाएगी।
वेदों और ग्रंथों का अनादर:
धार्मिक ग्रंथों, वेदों और पुराणों का सम्मान समाप्त हो जाएगा। लोग इन्हें अंधविश्वास मानने लगेंगे।
पूजा-पाठ का त्याग:
भगवान में आस्था कम हो जाएगी। लोग पूजा-पाठ छोड़ देंगे और नास्तिकता को प्रगति का प्रतीक मानेंगे।
क्या होगा कलियुग के अंत में?
इन लक्षणों के साथ-साथ कलियुग के अंत में प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी—अन्न की कमी, नदियों का सूखना, मौसम में असंतुलन और सामाजिक अराजकता जैसी स्थितियां उत्पन्न होंगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब अधर्म अपने चरम पर होगा, तब भगवान विष्णु ‘कल्कि अवतार’ के रूप में प्रकट होंगे। वे अधर्म का नाश कर पुनः धर्म की स्थापना करेंगे और सतयुग की शुरुआत होगी।










