Asim Munir : पाकिस्तान की सियासी फिजा में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है—जनरल असीम मुनीर। देश के मौजूदा सेना प्रमुख को लेकर चर्चा है कि वे जल्द ही पाकिस्तान के अगले राष्ट्रपति बनने की ओर बढ़ सकते हैं। सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक यह सवाल गर्म है: क्या पाकिस्तान एक बार फिर सैन्य शासन की ओर बढ़ रहा है?

हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने साफ कहा है कि “जनरल असीम मुनीर का राष्ट्रपति बनने का कोई इरादा नहीं है।” उन्होंने इस तरह की सभी खबरों को “भ्रामक, निराधार और तथ्यों से परे” बताया।

गृह मंत्री ने भी दी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी इन अफवाहों को “बेतुका और बेबुनियाद” करार दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता, और जनरल मुनीर सिर्फ सुरक्षा और स्थिरता के मामलों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, न कि सियासी पदों की दौड़ में हैं।
फिर क्यों उठ रही हैं ऐसी चर्चाएं?
इन अटकलों के पीछे कुछ हालिया घटनाएं और परिस्थितियां भी जिम्मेदार मानी जा रही हैं: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति जरदारी सार्वजनिक मंचों पर बेहद कम नजर आ रहे हैं,जबकि जनरल असीम मुनीर विदेशी दौरों, कूटनीतिक बैठकों और रणनीतिक फैसलों में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।अमेरिका, चीन और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ महत्वपूर्ण वार्ताएं स्वयं जनरल मुनीर ने की हैं, जो आमतौर पर प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री का दायित्व होता है।
इस बढ़ती सक्रियता को देख कई विश्लेषकों ने अनुमान लगाना शुरू किया कि क्या पाक सेना एक बार फिर परदे के पीछे से नहीं, बल्कि सीधे सत्ता में आने की तैयारी कर रही है?
क्या दोहराया जा सकता है इतिहास?
पाकिस्तान का इतिहास सैन्य हस्तक्षेप से भरा पड़ा है। अतीत में जनरल अयूब खान, जनरल याह्या खान, जनरल ज़ियाउल हक़ और परवेज़ मुशर्रफ़ जैसे सेना प्रमुखों ने नागरिक सरकारों को हटाकर खुद सत्ता संभाली थी। ऐसे में असीम मुनीर की बढ़ती सियासी मौजूदगी को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं।
फिलहाल, पाक सेना और सरकार दोनों की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि असीम मुनीर का राष्ट्रपति बनने का कोई इरादा नहीं है, और यह पूरी चर्चा सिर्फ अटकलों पर आधारित है। हालांकि, जनरल मुनीर की बढ़ती भूमिका और राजनीतिक नेतृत्व की निष्क्रियता को देखते हुए यह सवाल जरूर बना रहेगा कि पाकिस्तान की असली कमान किसके हाथ में है?
रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क










