Israel Palestine Conflict : EU ने इजराइल के E1 सेटलमेंट प्लान को ठुकराया, कहा- द्वि-राष्ट्र समाधान कमजोर होगा

इजराइल के E1 सेटलमेंट प्लान को लेकर यूरोपीय संघ ने कड़ा रुख अपनाया है। EU का कहना है कि यह योजना इजराइल और फिलिस्तीन के बीच प्रस्तावित द्वि-राष्ट्र समाधान को कमजोर कर सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि E1 क्षेत्र में निर्माण की योजना से पश्चिम एशिया की राजनीति और क्षेत्रीय तनाव पर क्या असर पड़ेगा?

Israel Palestine Conflict : इजराइल की E1 सेटलमेंट परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सूला वोन डेर लेयेन ने शुक्रवार को इजराइल द्वारा इस परियोजना के लिए निर्माण निविदाएं जारी करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इस कदम को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि इससे इजराइल और फिलिस्तीन के बीच प्रस्तावित दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाएं कमजोर हो सकती हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर कई देशों के साथ संयुक्त बयान भी जारी किया।

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15 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर जताया विरोध

वोन डेर लेयेन की ओर से जारी संयुक्त बयान में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूरोपीय आयोग, नीदरलैंड, कनाडा, नॉर्वे, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, स्वीडन, बेल्जियम, स्पेन, ऑस्ट्रिया और ग्रीस शामिल हैं। इन देशों ने इजराइली सरकार से E1 परियोजना को लेकर जारी निर्माण निविदाओं को वापस लेने की अपील की है। उनका कहना है कि वेस्ट बैंक में बस्तियों का विस्तार क्षेत्र में स्थायी शांति की राह को और कठिन बना सकता है।

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वेस्ट बैंक के विभाजन को लेकर चिंता

संयुक्त बयान में कहा गया कि E1 परियोजना वेस्ट बैंक को भौगोलिक रूप से विभाजित कर सकती है। इससे फिलिस्तीनी क्षेत्रों के बीच क्षेत्रीय निरंतरता प्रभावित होने की आशंका है। यूरोपीय देशों का मानना है कि इस तरह के कदम भविष्य में एक व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य के गठन की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने परियोजना के निर्माण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

निर्माण कंपनियों को कानूनी परिणाम की चेतावनी

संयुक्त बयान में उन कारोबारियों और कंपनियों को भी चेतावनी दी गई है, जो E1 परियोजना की निर्माण निविदाओं में हिस्सा लेने पर विचार कर रहे हैं। देशों ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में शामिल होने वाले व्यवसायों को संभावित कानूनी और प्रतिष्ठा संबंधी परिणामों को ध्यान में रखना चाहिए। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित गंभीर उल्लंघनों में शामिल होने के जोखिम का भी उल्लेख किया गया है।

बस्तियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला

यूरोपीय देशों ने अपने बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों को अवैध माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का लंबे समय से चला आ रहा रुख है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थिति से भी इसकी पुष्टि होती है। देशों ने मौजूदा परिस्थितियों में इस परियोजना को विशेष रूप से चिंताजनक बताया है।

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वेस्ट बैंक में बढ़ती अस्थिरता पर चिंता

संयुक्त बयान में वेस्ट बैंक की मौजूदा स्थिति का भी उल्लेख किया गया। देशों ने क्षेत्र में गंभीर अस्थिरता, फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ बस्तीवासियों की हिंसा और फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील माहौल में बस्ती विस्तार से तनाव और बढ़ सकता है तथा शांति स्थापित करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को झटका लग सकता है।

इजराइल से योजनाएं तत्काल वापस लेने की अपील

यूरोपीय देशों और अन्य साझेदारों ने इजराइल से E1 परियोजना की योजनाओं को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही वेस्ट बैंक में नई बस्तियों के विस्तार को रोकने का आग्रह किया गया है। संयुक्त बयान के मुताबिक, ऐसे कदम क्षेत्र को शांति से और दूर ले जा सकते हैं। साथ ही इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की स्थिति और कमजोर होने की आशंका भी जताई गई है।

दो-राष्ट्र समाधान के लिए प्रतिबद्धता दोहराई

वोन डेर लेयेन और बयान में शामिल देशों ने दो-राष्ट्र समाधान के आधार पर न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उनका कहना है कि इजराइल और फिलिस्तीन के बीच दीर्घकालिक समाधान के लिए दोनों पक्षों के अधिकारों और क्षेत्रीय निरंतरता का सम्मान जरूरी है। देशों ने कहा कि वे इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम जारी रखेंगे।

E1 परियोजना में 3,400 आवासीय इकाइयों की योजना

रिपोर्टों के अनुसार, E1 परियोजना के तहत लगभग 3,400 आवासीय इकाइयां बनाए जाने की योजना है। प्रस्तावित परियोजना के जरिए कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम को माले अदुमिम बस्ती क्षेत्र से जोड़ने की योजना बताई गई है। आलोचकों का कहना है कि इससे वेस्ट बैंक के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच संपर्क प्रभावित हो सकता है और भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की क्षेत्रीय निरंतरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

गाजा युद्ध के बाद बढ़ा बस्ती विस्तार का मुद्दा

गाजा में अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से इजराइली बस्तियों के विस्तार को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस और तेज हुई है। E1 परियोजना को लेकर यूरोपीय देशों की आपत्ति इसी व्यापक विवाद का हिस्सा है। फिलहाल इस मुद्दे पर इजराइल की ओर से आगे की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच संभावित बदलाव पर नजर बनी हुई है।

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Chandan Das

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