Economic D-Day : मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान बातचीत और समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका की शर्तों पर एक “सही डील” के लिए अभी तैयार नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि वाशिंगटन के पास सैन्य विकल्प खुले हुए हैं और आर्थिक दबाव के बावजूद अमेरिका अपनी रणनीतिक क्षमता बनाए हुए है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप का बड़ा दावा
साउथ कैरोलिना रवाना होने से पहले जॉइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री नाकाबंदी से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों पर नियंत्रण है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका आर्थिक और सैन्य दोनों विकल्पों पर विचार कर सकता है। ट्रंप के बयान के बाद क्षेत्रीय तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर ट्रंप ने उठाए सवाल
ट्रंप ने ईरान की आर्थिक स्थिति को बेहद खराब बताते हुए दावा किया कि देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान में महंगाई बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है और सरकार के सामने अपने सैनिकों तथा पुलिसकर्मियों को वेतन देने तक की चुनौती है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की मुद्रा का मूल्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है और देश की आर्थिक क्षमता कमजोर हो चुकी है।
ईरानी सेना को लेकर भी ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिकी और सहयोगी देशों की कार्रवाइयों से ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की नौसेना और वायुसेना कमजोर हो चुकी हैं। हालांकि, ईरान की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति के इन दावों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण बयानबाजी के कारण स्थिति और संवेदनशील होती जा रही है।
परमाणु हथियार रोकना बताया मुख्य लक्ष्य
ट्रंप ने एक रेडियो इंटरव्यू में दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वह इस उद्देश्य के लिए कठोर फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मुद्दे को अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जाता है।
ट्रंप ने घोषित किया ‘इकोनॉमिक D-Day’
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान के खिलाफ “इकोनॉमिक D-Day” का ऐलान किया। उन्होंने सहयोगी और मित्र देशों से ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ देने की अपील की। अमेरिकी रणनीति के तहत ईरान से जुड़े तेल तस्करी नेटवर्क, नकद लेनदेन, मनी एक्सचेंज कंपनियों, जहाज पंजीकरण और शेल कंपनियों पर कार्रवाई करने की बात कही गई है।
विदेशी कंपनियों को भी अमेरिका की चेतावनी
अमेरिका ने संकेत दिया है कि जो देश या विदेशी कंपनियां ईरान के साथ व्यापारिक और वित्तीय संबंध बनाए रखेंगी, उन्हें गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। वाशिंगटन का उद्देश्य ईरान की आय और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क तक पहुंच को सीमित करना बताया गया है। इस नीति से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
ईरान ने अमेरिकी दबाव को किया खारिज
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी दबाव और “इकोनॉमिक D-Day” की घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान पहले भी लंबे समय तक प्रतिबंधों और अधिकतम दबाव की रणनीति का सामना कर चुका है। उनका दावा है कि पिछली आर्थिक पाबंदियां भी अपने लक्ष्य हासिल करने में विफल रही थीं और मौजूदा अमेरिकी अभियान का परिणाम भी अलग नहीं होगा।
ईरान ने होर्मुज को लेकर रखी शर्त
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने कहा कि अमेरिका द्वारा 14-सूत्रीय समझौते की शर्तें पूरी किए जाने तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमत नहीं होगा। ईरान की मांगों में नाकाबंदी हटाना, जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करना और तेल प्रतिबंधों में राहत शामिल बताई गई है। इससे होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध और बढ़ सकता है।
वैश्विक बाजारों की नजर होर्मुज पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य या आर्थिक टकराव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों की अगली रणनीति और संभावित बातचीत पर टिकी है।
Read More : Israel Palestine Conflict : EU ने इजराइल के E1 सेटलमेंट प्लान को ठुकराया, कहा- द्वि-राष्ट्र समाधान कमजोर होगा