Festival Inflation : त्योहारों से पहले महंगाई बढ़ने का खतरा, 6 फीसदी के पार जा सकती है महंगाई दर

त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। अनुमान है कि महंगाई दर 6 फीसदी के पार जा सकती है, जिससे आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित होगा। खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। लेकिन आखिर हालात कब सुधरेंगे?

Festival Inflation : भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई को लेकर SBI Research की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ाने वाला अनुमान सामने रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले अक्टूबर और नवंबर महीनों में देश की खुदरा महंगाई दर कुछ समय के लिए 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा को पार कर सकती है। हालांकि, यह तेजी लंबे समय तक रहने की संभावना नहीं है। वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही यानी Q4 तक महंगाई में दोबारा नरमी आने और इसके करीब 5 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान जताया गया है।

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अगस्त में 4.7 फीसदी तक पहुंच सकती है महंगाई

SBI Research के अनुमान के अनुसार, जुलाई में 4.45 प्रतिशत रही खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर लगभग 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य आपूर्ति की स्थिति में लगातार सुधार महंगाई के दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों का रुख खुदरा महंगाई की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा।

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मानसून ने महंगाई को लेकर बढ़ाई उम्मीद

इस साल मानसून की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही थी, जिससे बारिश की कमी काफी बढ़ गई थी। जून में बारिश का घाटा करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हालांकि, जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश और अगस्त में सामान्य बारिश होने के कारण यह कमी घटकर लगभग 13 प्रतिशत रह गई। बेहतर बारिश से कृषि गतिविधियों को समर्थन मिला है और खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है।

सिंचाई सुविधाओं से खेती को मिला सहारा

रिपोर्ट में देश की बेहतर होती सिंचाई व्यवस्था को भी अहम सकारात्मक संकेत बताया गया है। प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में बारिश सामान्य से कम रहने के बावजूद खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले केवल करीब 2 प्रतिशत कम रही है। इससे संकेत मिलता है कि किसानों की निर्भरता केवल मानसूनी बारिश पर पहले की तुलना में कम हुई है। बेहतर सिंचाई व्यवस्था ने उत्पादन को स्थिर रखने में मदद की है।

IOD ने अल नीनो के असर को किया कम

SBI Research ने इंडियन ओशन डिपोल यानी IOD की सकारात्मक स्थिति को भी भारतीय कृषि के लिए राहत देने वाला कारक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, सकारात्मक IOD अल नीनो के संभावित प्रतिकूल प्रभावों को काफी हद तक संतुलित करने में मदद कर रहा है। यदि मौसम की स्थिति अनुकूल बनी रहती है तो आने वाले महीनों में खाद्य आपूर्ति बेहतर रहने और कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है।

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Q4 में महंगाई अनुमान से नीचे रहने की उम्मीद

रिपोर्ट में ऐतिहासिक रुझानों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही में महंगाई दर मौजूदा अनुमानों से भी नीचे रह सकती है। हालांकि, इससे पहले अक्टूबर और नवंबर में अस्थायी तेजी देखने को मिल सकती है। यानी उपभोक्ताओं को कुछ समय के लिए महंगाई का दबाव झेलना पड़ सकता है, लेकिन बाद में स्थिति सुधरने की उम्मीद है।

RBI महंगाई के आंकड़ों पर रखेगा नजर

भारतीय रिजर्व बैंक भी महंगाई के भविष्य के रुख को लेकर अतिरिक्त आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, नीतिगत ब्याज दरों में किसी भी बदलाव से पहले महंगाई को लेकर अधिक स्पष्टता जरूरी है। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के मिनट्स से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय आने वाले आंकड़ों और आर्थिक संकेतकों का आकलन करना चाहता है।

मौद्रिक नीति पर आगे की तस्वीर होगी साफ

RBI के अनुसार, महंगाई में सामान्य स्थिति लौटने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, केंद्रीय बैंक भविष्य की मौद्रिक नीति तय करने से पहले कीमतों के रुझान और आर्थिक परिस्थितियों को और समझना चाहता है। ऐसे में आगामी महीनों में जारी होने वाले महंगाई के आंकड़े ब्याज दरों को लेकर RBI के अगले कदम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

VRRR और FCNR रणनीति पर SBI की नजर

SBI Research ने अपनी रिपोर्ट में RBI की हालिया तरलता प्रबंधन रणनीति का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो यानी VRRR ऑपरेशंस और FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने जैसे कदम केवल मौखिक संकेतों या भविष्य के दिशा-निर्देशों की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इन उपायों का उद्देश्य वित्तीय बाजार में स्थिरता और पर्याप्त तरलता बनाए रखने में मदद करना है।

वैश्विक बाजारों का भी दिख रहा असर

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और सरकारी ऋण बाजार से जुड़े उपायों का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है। बॉन्ड यील्ड को संतुलित करने के प्रयासों के चलते लंबी अवधि की यील्ड में नरमी देखी गई है। इसका असर वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत की महंगाई और मौद्रिक नीति पर घरेलू परिस्थितियों के साथ वैश्विक घटनाक्रम की भी नजर रहेगी।

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Chandan Das

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