Uttar Pradesh Politics : देश की राजनीति में वोट चोरी और धांधली के आरोपों को लेकर गर्माहट लगातार बढ़ रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के कन्नौज से बीजेपी विधायक और योगी सरकार के मंत्री असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर वोटर लिस्ट में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। इस आरोप के बाद सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मंत्री असीम अरुण को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर करारा जवाब दिया है, जिससे राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।

बीजेपी मंत्री असीम अरुण का आरोप
उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कन्नौज की वोटर लिस्ट में कथित धांधली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एक वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए कहा कि सपा के समय ब्लॉक प्रमुख रहे नवाब सिंह यादव का नाम वोटर लिस्ट में दो जगह दर्ज था—अरंगापुर और ग्वाल मैदान। इससे स्पष्ट होता है कि वोटर लिस्ट में गलत तरीके से दखलअंदाजी हुई है। असीम अरुण ने कहा कि वे चुनाव आयोग का समर्थन करते हैं जो वोटर लिस्ट की कमियों को दूर करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार के दौरान वोटर लिस्ट में इस तरह की गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

अखिलेश यादव का कड़ा जवाब
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने असीम अरुण के आरोपों को राजनीतिक खेल बताया और उन्हें आड़े हाथ लिया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “देखना है कि अपनी ही सरकार के कार्यकाल में धांधली का आरोप लगाने वालों को दिल्ली वाले हटाते हैं या लखनऊ वाले। ‘दो इंजन के बीच में…’ वाली कहावत में इनका पत्ता साफ होता है। क्योंकि दिल्ली वालों को लग रहा है कि हमारे अधीन आने वाले आयोग पर ‘किसी और के कहने पर’ उंगली उठाई जा रही है, और लखनऊ वालों को लग रहा है कि हमारे प्रशासन पर ‘किसी और के कहने पर’ आरोप लगाए जा रहे हैं।
अब ये हटे नहीं तो घट तो जाएंगे ही। कभी-कभी ज्यादा होशियारी भारी पड़ जाती है। ये तो गए!” अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना है और यह संकेत देता है कि वे चुनाव आयोग और प्रशासन की निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहे हैं।
राजनीतिक माहौल और प्रभाव
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। वोट चोरी और चुनावी धांधली के आरोप-पल्ले इस लड़ाई को और तीखा बना रहे हैं। बीजेपी और सपा दोनों ही पार्टियां इस मुद्दे को अपने-अपने प्रचार में इस्तेमाल कर रही हैं। इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उत्तर प्रदेश में कन्नौज से शुरू हुआ यह विवाद राज्य की राजनीतिक हलचलों को और बढ़ा सकता है। असीम अरुण के आरोप और अखिलेश यादव के जवाब ने दोनों पक्षों के बीच विवाद को गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है, यह देखने वाली बात होगी, खासकर चुनाव से पहले यह मुद्दा दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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