US-Iran Tension: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर हिंसक मोड़ पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बलों द्वारा जहाजों पर किए गए हमले के बाद, अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया है। इस गोलाबारी ने क्षेत्र में शांति बहाली की तमाम उम्मीदों को धूमिल कर दिया है। अमेरिका की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है। दोनों देशों के बीच बढ़ती इस तनातनी ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

शांति वार्ता के बीच क्यों टूटी डील? जेडी वेंस ने बताई वजह
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से बात करते हुए शांति प्रयासों के विफल होने का खुलासा किया है। वेंस के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक स्पष्ट समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य होर्मुज में जहाजों पर होने वाले हमलों को रोकना और बदले में अमेरिकी नाकेबंदी को समाप्त करना था। समझौते की शर्त यह थी कि यदि ईरान जहाजों पर बमबारी बंद करता है, तो अमेरिका अपनी घेराबंदी हटा लेगा। हालांकि, ईरान ने इस समझौते का उल्लंघन करते हुए 24 घंटे के भीतर ही फिर से जहाजों पर गोलाबारी शुरू कर दी। वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की नीति बहुत सरल है—यदि ईरान शांति के बदले हमला करेगा, तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक जोरदार और घातक पलटवार करेगा।

होर्मुज को खुला रखने के लिए अमेरिका का सख्त रुख
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने डोनाल्ड ट्रंप के सख्त निर्देशों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य की स्वतंत्रता को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे हर हाल में खुला रखा जाना चाहिए। ईरान को चेतावनी देते हुए वेंस ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों के लिए तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना अमेरिका की प्राथमिकता है। ट्रंप प्रशासन का संदेश साफ है—ईरान या तो इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग को खुला रखने की शर्त को स्वीकार करे, अन्यथा उसे कल रात जैसी सैन्य कार्रवाई का निरंतर सामना करना पड़ेगा। अमेरिका के इस रुख ने ईरान के लिए एक कठिन कूटनीतिक और सैन्य चुनौती पेश कर दी है।

ईरानी सैन्य क्षमता को नेस्तनाबूद करने की कार्रवाई जारी
यूएस सेंट्रल कमांड फोर्सेस के अनुसार, अमेरिकी सेना प्रमुख के सीधे निर्देश पर ईरान की हमलावर क्षमताओं को कुचलने के लिए हवाई अभियान तेज कर दिए गए हैं। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस शक्ति को कमजोर करना है, जो होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को बाधित करती है। अमेरिका ने ईरान को हालिया हमलों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। इस सैन्य कार्रवाई के जरिए अमेरिका ईरान को कड़ा संदेश दे रहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कीमत उन्हें अपने सैन्य ठिकानों के विनाश के रूप में चुकानी पड़ेगी। वर्तमान में स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष के भविष्य को लेकर चिंतित है।
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