Ganesh Chaturthi 2026: भगवान गणेश की पूजा में कई प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित की जाती है, लेकिन दूर्वा घास का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दूर्वा भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है। यही कारण है कि गणपति पूजा के दौरान भक्त श्रद्धा के साथ दूर्वा की गांठ भगवान को अर्पित करते हैं। खास तौर पर 21 दूर्वा की गांठ चढ़ाने की परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है। इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
2026 में इस दिन होगी गणेश चतुर्थी
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु अपने घरों और विभिन्न पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगे। गणेश उत्सव के दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर दूर्वा, मोदक, सिंदूर, लाल फूल और फल सहित भगवान गणेश को प्रिय मानी जाने वाली सामग्री अर्पित की जाती है।
भगवान गणेश को क्यों प्रिय मानी जाती है दूर्वा
दूर्वा को भगवान गणेश से जोड़ने वाली एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, अनलासुर नामक असुर अपनी अग्नि जैसी शक्ति से देवताओं और ऋषियों को परेशान करता था। उसका अंत करने के लिए भगवान गणेश ने उसका सामना किया और उसे निगल लिया। इसके बाद गणेश जी के शरीर में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न हो गई।
दूर्वा अर्पित करने से मिली थी राहत
कथा के अनुसार, भगवान गणेश के शरीर की गर्मी शांत करने के लिए ऋषियों ने उन्हें दूर्वा अर्पित की। दूर्वा ग्रहण करने के बाद गणेश जी को राहत मिली। इसी पौराणिक मान्यता को गणपति पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, यह धार्मिक कथा और लोक मान्यता पर आधारित परंपरा है।
21 दूर्वा की गांठ का क्या है महत्व
हिंदू धार्मिक परंपराओं में 21 अंक को विशेष महत्व दिया जाता है। एक मान्यता के अनुसार, मनुष्य के पांच ज्ञानेंद्रियां, पांच कर्मेंद्रियां, पांच प्राण, पांच तत्व और मन को मिलाकर कुल 21 तत्व माने गए हैं। भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करना इन सभी तत्वों को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से गणपति पूजा में 21 दूर्वा चढ़ाने की परंपरा को विशेष माना जाता है।
गणेश चतुर्थी पर दूर्वा कैसे चढ़ाएं
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर दीपक जलाएं और पूजा शुरू करें। सिंदूर, अक्षत, लाल फूल और अन्य सामग्री अर्पित करने के बाद दूर्वा की पत्तियों को एक साथ रखकर गांठ बनाकर भगवान गणेश को चढ़ाने की परंपरा है। इस दौरान गणेश मंत्र का जाप करते हुए सुख, समृद्धि, बुद्धि और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।
दूर्वा के साथ मोदक और लाल फूल करें अर्पित
गणेश चतुर्थी की पूजा में दूर्वा के साथ भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग भी लगाया जाता है। इसके अलावा सिंदूर, लाल फूल और फल अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि मोदक गणपति बप्पा को प्रिय हैं, इसलिए गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है।
श्रद्धा से करें गणपति बप्पा की पूजा
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना का प्रमुख पर्व है। इस दिन भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करते हैं। दूर्वा की 21 गांठ चढ़ाने की परंपरा भी इसी आस्था का हिस्सा है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक गणपति की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता आती है तथा भगवान गणेश विघ्नों को दूर करने का आशीर्वाद देते हैं।
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