Peacock deaths
Peacock deaths: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक हृदयविदारक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लोनी क्षेत्र के पचायारा गांव में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक मूली के खेत के पास बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर मृत अवस्था में पाए गए। ग्रामीणों ने जब एक साथ इतनी संख्या में मोरों को जमीन पर गिरा देखा, तो इलाके में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुल 10 मोरों की जान जा चुकी है, जबकि एक मोर बेहोशी की हालत में मिला है, जिसका जीवन बचाने के लिए संघर्ष जारी है।
इस दुखद घटना का खुलासा तब हुआ जब गांव का एक किसान अपनी गेहूं की फसल का निरीक्षण करने खेत पर गया था। पक्षियों को निर्जीव अवस्था में पड़ा देख उसने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस की सूचना पर वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सकों का एक विशेष दल आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुँचा। वन विभाग की उप-मंडल अधिकारी (SDO) सलोनी ने बताया कि खेत में कुल 11 मोर मिले थे, जिनमें से 10 की मौत हो चुकी थी। जीवित बचे एकमात्र मोर को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पशु अस्पताल भेजा गया है।
मोरों की मौत का सही कारण जानने के लिए वन विभाग ने सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए SDO सलोनी ने आशंका जताई है कि पक्षियों ने किसी जहरीले पदार्थ या कीटनाशक का सेवन किया होगा। यह भी संभव है कि उन्होंने पास के किसी दूषित जल स्रोत से पानी पिया हो। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह केवल एक दुर्घटना थी या किसी ने जानबूझकर इन पक्षियों को निशाना बनाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडल वन अधिकारी (DFO) ईशा सिंह ने विशेषज्ञों के साथ इलाके का दौरा किया। फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों से मिट्टी और पानी के नमूने एकत्र किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां कोई घातक रसायन तो मौजूद नहीं था। गौर करने वाली बात यह है कि मृत मोरों के शरीर पर बाहरी चोट या संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी मौत आंतरिक विषाक्तता (Internal Poisoning) के कारण हुई है।
इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पड़ोसी जिले बागपत की फैक्ट्रियों और उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक और जहरीला पानी स्थानीय नालों और यमुना नदी में बिना शोधन के बहाया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस प्रदूषित पानी को पीने से आए दिन मवेशी और पक्षी काल के गाल में समा रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने फैक्ट्री मालिकों की लापरवाही को इन बेगुनाह पक्षियों की मौत का जिम्मेदार ठहराया है।
घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण रविंद्र सिंह ने इसे एक गहरी साजिश करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि जहां मोरों के शव मिले थे, उसके पास से कीटनाशक के कई खाली पैकेट और बोतलें बरामद हुई हैं। इससे यह संदेह पैदा होता है कि किसी असामाजिक तत्व ने जानबूझकर अनाज में जहर मिलाकर मोरों को खिलाया होगा। वन विभाग ने इन दावों की भी जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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