Gold Silver Price
Gold Silver Price : भारतीय वायदा बाजार (MCX) में मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी का रुख देखने को मिला है। सुबह के शुरुआती कारोबारी सत्र में ही निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर बढ़ा, जिससे भाव में मजबूती आई। सुबह 10:13 बजे, एमसीएक्स पर 5 जून 2026 की डिलीवरी वाला सोना 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,50,358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल वैश्विक अस्थिरता और घरेलू मांग के बीच निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से सोना अभी भी एक मजबूत निवेश विकल्प बना हुआ है।
सोने के साथ-साथ चांदी के भाव में भी मंगलवार को सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 5 मई 2026 की डिलीवरी के लिए चांदी का अनुबंध बीते सत्र के मुकाबले 0.39 प्रतिशत चढ़कर 2,34,300 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर ट्रेड करता नजर आया। चांदी की कीमतों में यह वृद्धि न केवल निवेश के उद्देश्य से है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं का भी परिणाम मानी जा रही है। चांदी का यह उच्च स्तर छोटे निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
देश के प्रमुख शहरों में मंगलवार को सोने की हाजिर कीमतों (Spot Prices) में भी अंतर देखा गया। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट (99.9% शुद्धता) सोने की कीमत 14,999 रुपये प्रति ग्राम दर्ज की गई, जबकि 22 कैरेट का भाव 13,750 रुपये रहा। वहीं, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में सोने की कीमतें लगभग समान स्तर पर रहीं, जहाँ 24 कैरेट सोना 14,984 रुपये प्रति ग्राम पर उपलब्ध है। दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में कीमतें थोड़ी अधिक रहीं, जहाँ शुद्ध सोना 15,120 रुपये प्रति ग्राम के पार निकल गया। यह स्थानीय करों और मांग में अंतर के कारण है।
वैश्विक स्तर पर लगातार दो सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,650 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रहा। निवेशकों की नजरें वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन बयानों पर टिकी हैं, जिसमें उन्होंने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस तनावपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिति ने निवेशकों के मन में लंबे संघर्ष और इसके आर्थिक परिणामों को लेकर डर पैदा कर दिया है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से सोने की कीमतों में वैश्विक स्तर पर लगभग 12% की गिरावट आ चुकी है, क्योंकि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है।
ईरान-अमेरिका युद्ध और इसके परिणामस्वरूप ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) के खतरे को बढ़ा दिया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ती है। ऐसी स्थिति में दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, विशेषकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, ब्याज दरों में बदलाव को लेकर असमंजस में हैं। यदि मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो सोने की मांग एक ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) के रूप में फिर से बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा ही यह तय करेगी कि सोने की चमक और बढ़ेगी या इसमें सुधार आएगा।
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