Bengal Election 2026
Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच कोलकाता की सड़कों पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने राहगीरों और मतदाताओं को हैरान कर दिया। बंगाली नववर्ष (पोइला बैसाख) के शुभ अवसर पर कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार राकेश सिंह हाथ में बड़ी मछलियां लेकर चुनाव प्रचार करते नजर आए। पारंपरिक धोती-कुर्ता पहने राकेश सिंह का यह अंदाज दरअसल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उस नैरेटिव का जवाब था, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भाजपा के सत्ता में आने पर बंगालियों का खान-पान बदल दिया जाएगा। भाजपा प्रत्याशी ने इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी की संस्कृति किसी के भोजन पर पाबंदी लगाने की नहीं है।
इस पूरे ‘मछली विवाद’ की जड़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वे भाषण हैं, जो वे अपनी लगभग हर जनसभा में दे रही हैं। ममता बनर्जी लगातार मतदाताओं को आगाह कर रही हैं कि यदि भारतीय जनता पार्टी बंगाल की सत्ता पर काबिज होती है, तो वे बंगालियों की पहचान और उनके प्रिय भोजन ‘मछली और भात’ पर रोक लगा देंगे। ममता के इस बयान को भाजपा एक बड़ा झूठ और दुष्प्रचार मान रही है। भाजपा का तर्क है कि टीएमसी हार के डर से लोगों की भावनाओं और खान-पान को लेकर भ्रम फैला रही है, ताकि अल्पसंख्यक और बंगाली समुदाय को डराया जा सके।
कोलकाता पोर्ट सीट से भाजपा के राकेश सिंह का मुकाबला तृणमूल के दिग्गज नेता फिरहाद हकीम से है। प्रचार के दौरान राकेश सिंह ने केवल मछली पर ही बात नहीं की, बल्कि स्थानीय मुद्दों पर भी हकीम को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद फिरहाद हकीम ने युवाओं के रोजगार और बुनियादी ढांचे के लिए कोई ठोस काम नहीं किया है। राकेश सिंह ने दावा किया कि पोर्ट इलाके की जनता अब विकास चाहती है और वे टीएमसी के भ्रामक प्रचार के बजाय भाजपा की नीतियों पर भरोसा कर रही है।
भाजपा के इस दांव का जवाब देने में तृणमूल कांग्रेस ने भी देर नहीं की। टॉलीगंज विधानसभा सीट से टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवार अरूप बिस्वास भी बंगाली नववर्ष के मौके पर दोनों हाथों में मछली लेकर चुनाव मैदान में उतर आए। अरूप बिस्वास ने भी उसी अंदाज में मछलियां लहराते हुए मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश की कि बंगाल की संस्कृति को केवल तृणमूल ही सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए फिर से वही आरोप दोहराया कि भाजपा का एजेंडा बंगालियों के पारंपरिक रहन-सहन और खान-पान में हस्तक्षेप करना है।
कोलकाता पोर्ट और टॉलीगंज के मतदाताओं के लिए यह चुनाव प्रचार मनोरंजन और चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर नेता मछली के बहाने अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बंगाल और मछली का रिश्ता अटूट है, जिसे कोई भी राजनीतिक दल प्रभावित नहीं कर सकता। वोटरों का मानना है कि चुनाव रोजगार, सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर लड़ा जाना चाहिए, न कि थाली में रखी मछली पर। हालांकि, इस ‘फिश वॉर’ ने बंगाल चुनाव की रंजिश को एक नया और दिलचस्प मोड़ जरूर दे दिया है। अब देखना यह होगा कि मछली का यह दांव किस पार्टी की चुनावी नैया पार लगाता है।
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