Hamidia Hospital tragedy
Hamidia Hospital tragedy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल परिसर में बुधवार तड़के एक बेहद सनसनीखेज और हृदय विदारक घटना सामने आई। अस्पताल परिसर में मॉर्चुरी (शवगृह) के पास स्थित एक पुरानी पानी की टंकी से दो नवजात बच्चों के अधजले शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पुरानी टंकी को अस्पताल प्रबंधन द्वारा लंबे समय से डस्टबिन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। यह भयावह मामला तब उजागर हुआ जब तड़के इस कचरे में अचानक आग लग गई।
मिली जानकारी के अनुसार, कचरे में आग लगने की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन ने फायर ब्रिगेड को बुलाया। आग पर काबू पाने के बाद जब अग्निशमन दल ने टंकी की गहराई से जांच की, तो उसके भीतर दो नवजात बच्चों के जले हुए शव पाए गए। शवों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी, उन पर प्लास्टिक और पन्नी चिपकी हुई थी, जो उन्हें जलाने के प्रयास का संकेत देती है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद दोपहर करीब दो बजे कोह-ए-फिजा पुलिस को घटना की सूचना दी गई। दोनों शवों को फिलहाल मॉर्चुरी में सुरक्षित रखवा दिया गया है और पुलिस ने तुरंत मामले की जाँच शुरू कर दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया है। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे, 5 डॉक्टरों की एक विशेष टीम दोनों नवजात शवों का पोस्टमॉर्टम कर रही है। कोह-ए-फिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला स्वयं पोस्टमॉर्टम रूम में मौजूद हैं ताकि पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा सके। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है। किसी भी तरह की संभावित गड़बड़ी या हस्तक्षेप से बचने के लिए, पोस्टमॉर्टम हाउस के गेटों पर ताले लगा दिए गए हैं और बाहर गार्डों की तैनाती की गई है, जिससे अंदर किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं है।
पुलिस के अनुसार, दोनों नवजात शवों की स्थिति अलग-अलग थी। एक नवजात बच्चे का शव लगभग 90 फीसदी तक जल चुका था, जिससे उसकी पहचान और मौत के कारणों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। वहीं, दूसरा शव आंशिक रूप से जला हुआ था। दोनों शवों की पंचनामा कार्रवाई के बाद उन्हें विधिवत पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने आशंका जताई है कि नवजात बच्चों को पन्नी में लपेटकर कचरे में डाला गया होगा और फिर उसमें आग लगा दी गई होगी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ही इस बात का खुलासा करेगी कि नवजातों को मृत अवस्था में जलाया गया या जीवित।
पुलिस इस पूरे मामले की हर एंगल से गहन जाँच कर रही है। जाँच में अस्पताल के रिकॉर्ड, परिसर के सीसीटीवी फुटेज, डीएनए टेस्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने डीएनए सैंपल सुरक्षित करने के भी निर्देश दिए हैं, जिससे नवजातों के माता-पिता की पहचान हो सके। पुलिस की एक टीम मॉर्चुरी रूम में पदस्थ कर्मचारियों और डॉक्टर से भी विस्तृत पूछताछ करेगी। इसके अलावा, कचरे में से अस्पताल में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बेडशीट भी बरामद हुई है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि बच्चों को अस्पताल की बेडशीट में लपेटकर टंकी में फेंका गया होगा।
इस बेहद गंभीर और अमानवीय घटना ने अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है। थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने स्वीकार किया कि मॉर्चुरी के पास स्थित पुरानी टंकी में मरीजों और कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से कचरा फेंका जाता था और उसमें आग भी लगा दी जाती थी, जो कचरा निस्तारण की गलत व्यवस्था को दिखाता है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट (Biomedical Waste) के निष्पादन की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। इसके साथ ही, मॉर्चुरी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की खराब क्वालिटी भी जाँच में बाधा डाल रही है, क्योंकि जो फुटेज मिले हैं, वे स्पष्ट नहीं हैं।
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