Hemant Soren : झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका देते हुए ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग वाली अंतरिम अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि सोरेन के खिलाफ लगाए गए कथित कृत्यों का उनके आधिकारिक दायित्वों के निर्वहन से उचित और वास्तविक संबंध दिखाई नहीं देता। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी केवल अंतरिम राहत पर विचार करने तक सीमित है।
19 सितंबर को प्रस्तावित थी आरोप तय करने की कार्यवाही
हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन के साथ अंतरिम आवेदन दाखिल किया था। इसमें ECIR केस नंबर 6/2023 की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी। मामले में रांची की विशेष PMLA अदालत ने 8 जून 2026 को सोरेन की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद 19 सितंबर को आरोप तय करने की कार्यवाही प्रस्तावित थी।
अभियोजन स्वीकृति को लेकर सोरेन की दलील
सोरेन की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि मामला 1 जुलाई 2024 से पहले लंबित कार्यवाही से जुड़ा है। इसलिए BNSS की धारा 531 की बचत व्यवस्था के तहत CrPC की धारा 197 लागू होनी चाहिए। उनके पक्ष ने कहा कि राज्यपाल से अभियोजन की पूर्व स्वीकृति मांगी गई थी, लेकिन अब तक स्वीकृति से संबंधित कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
ईडी ने सैंक्शन को लेकर रखा अलग पक्ष
ईडी ने अदालत में सोरेन की दलील का विरोध किया। जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि इस मामले में BNSS की धारा 218 लागू होगी। ईडी ने यह भी दलील दी कि निर्धारित 120 दिनों के भीतर निर्णय नहीं होने की स्थिति में अभियोजन स्वीकृति को ‘डीम्ड’ माना जा सकता है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच कानूनी मतभेद सामने आया।
कोर्ट ने आधिकारिक कर्तव्य से संबंध पर की टिप्पणी
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि सरकारी कर्मचारी को CrPC की धारा 197 के तहत संरक्षण तभी मिल सकता है, जब कथित कृत्य का उसके आधिकारिक दायित्व से उचित और वास्तविक संबंध हो। अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया कहा कि सोरेन पर लगाए गए आरोपित कृत्य उनके आधिकारिक दायित्वों से संबंधित नजर नहीं आते हैं।
सैंक्शन का सवाल ट्रायल में भी तय हो सकता है
अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन की स्वीकृति का मुद्दा कई परिस्थितियों में कानून और तथ्यों का मिश्रित प्रश्न हो सकता है। इसलिए इस विषय पर अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर किया जा सकता है। कोर्ट ने अंतरिम चरण में इस मुद्दे पर कोई अंतिम निष्कर्ष देने से परहेज किया।
8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
ईडी के अनुसार, मामले की जांच रांची के बरियातू और बारगेन क्षेत्र में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े से शुरू हुई थी। एजेंसी की जांच में 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और कब्जे से जुड़े आरोप सामने आए। जांच में राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और दस्तावेजों में बदलाव के आरोपों का भी उल्लेख किया गया।
तलाशी में नकदी और BMW कार बरामद
अदालत के आदेश में ईडी की ओर से पेश सामग्री का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 29 जनवरी 2024 को हुई तलाशी के दौरान 36.34 लाख रुपये नकद, एक BMW कार और कई दस्तावेज जब्त किए गए थे। ईडी ने इन बरामद वस्तुओं और दस्तावेजों को जांच से संबंधित साक्ष्यों के रूप में पेश किया है।
सोरेन ने आरोपों को बताया आधारहीन
ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हेमंत सोरेन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल जमीन से संबंधित प्रक्रिया को प्रभावित करने और कथित कब्जे को छिपाने के लिए समानांतर दस्तावेज तैयार कराने में किया। वहीं, सोरेन की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। उनके पक्ष ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का प्रथमदृष्टया मामला नहीं बनता और पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से करेगा मामले की सुनवाई
हाईकोर्ट ने अंतरिम अर्जी संख्या 12139/2026 खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर ट्रायल रोकना उचित नहीं होगा कि फिलहाल अभियोजन की स्वीकृति उपलब्ध नहीं है। अदालत ने साफ किया कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियां केवल अंतरिम राहत के सवाल तक सीमित हैं। ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार सुनवाई जारी रखेगा।
14 अक्टूबर को फिर सूचीबद्ध होगी याचिका
मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। हाईकोर्ट ने क्रिमिनल रिवीजन नंबर 982/2026 को इसी प्रकरण से संबंधित क्रिमिनल मिसलेनियस पिटीशन नंबर 2687/2026 के साथ 14 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। इससे मामले में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई की तारीख तय हो गई है।
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