Himachal Pradesh Disaster: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के चलते हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। प्रदेशभर में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। इस बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में बड़ा ऐलान करते हुए हिमाचल को आपदाग्रस्त राज्य घोषित कर दिया है। यह घोषणा राज्य में पिछले कई हफ्तों से हो रही बारिश, जान-माल के नुकसान और बुनियादी ढांचे की तबाही को देखते हुए की गई है।

लगातार बारिश से बिगड़े हालात
प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश ने कोहराम मचा रखा है। सड़कें टूट चुकी हैं, पुल बह चुके हैं और कई इलाके पूरी तरह से कट गए हैं। स्कूल-कॉलेज बंद हैं, और राहत कार्यों में जुटी टीमें भी कई जगहों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, लेकिन भूस्खलन और जलभराव के चलते दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं।

विधानसभा में मुख्यमंत्री का ऐलान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा:“प्रदेश को वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ‘आपदाग्रस्त राज्य’ घोषित किया जाता है। इससे हमें केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता और संसाधनों की मांग करने का अधिकार मिलेगा। साथ ही, राहत कार्यों में भी तेजी लाई जा सकेगी।”उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार सभी प्रभावित परिवारों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
वर्ल्ड हेरिटेज रेलवे ट्रैक भी बंद
भारी बारिश और लैंडस्लाइड का असर हिमाचल की वर्ल्ड हेरिटेज ‘कालका-शिमला रेलवे ट्रैक’ पर भी देखने को मिला है। कोटी से कनोह स्टेशन के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण रेलवे ट्रैक बुरी तरह डैमेज हो गया है।
रेलवे बोर्ड ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर बताया है कि 5 सितंबर 2025 तक सभी ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
ट्रैवल और टूरिज्म को तगड़ा झटका
हिमाचल की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर करता है। मानसून सीजन में हजारों पर्यटक शिमला, मनाली, धर्मशाला और कसौली जैसे हिल स्टेशनों की ओर रुख करते हैं। लेकिन इस बार बारिश और भूस्खलन के कारण कई मार्गों पर यातायात पूरी तरह बंद है। इसके चलते पर्यटन उद्योग को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
स्कूल-कॉलेज, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
भारी बारिश के चलते कई जिलों में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित हो चुकी हैं क्योंकि अस्पतालों तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही हैं। पानी और बिजली की आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में ठप है, जिससे स्थानीय लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद
राज्य सरकार ने केंद्र से आर्थिक सहायता और विशेष पैकेज की मांग की है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की है और आग्रह किया है कि हिमाचल को राष्ट्रीय आपदा के स्तर पर मदद दी जाए। उन्होंने कहा कि जो नुकसान हुआ है, वह प्रदेश के सीमित संसाधनों से संभालना असंभव है।
हिमाचल को चाहिए देश का साथ
हिमाचल प्रदेश इस समय प्राकृतिक आपदा के गंभीर दौर से गुजर रहा है। मुख्यमंत्री की ओर से ‘आपदाग्रस्त राज्य’ घोषित किया जाना इस संकट को लेकर सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। अब जरूरत है कि राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर केंद्र और अन्य राज्यों से हिमाचल को राहत और पुनर्वास के लिए मदद मिले, ताकि सामान्य जीवन को फिर से पटरी पर लाया जा सके।










