HIV Alert Surguja : सरगुजा संभाग में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार को लेकर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में सामने आए आंकड़ों ने स्वास्थ्य सेवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। जिला एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेंद्र गुप्ता के अनुसार, उपलब्ध अभिलेखों में पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों (MSM) के समूह में जांच के दायरे में आए 64 लोगों में से 18 एचआईवी संक्रमित दर्ज किए गए हैं। वहीं, महिला यौनकर्मियों के समूह में 1,043 में से 16 और उभयलिंगी यौनकर्मियों के समूह में छह में से चार लोग संक्रमित पाए गए हैं।

हालांकि, इन आंकड़ों को संबंधित समुदायों की समग्र संक्रमण दर नहीं माना जा सकता। ये केवल उपलब्ध अभिलेखों और जांच के दायरे में आए लोगों से संबंधित आंकड़े हैं। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए किसी समुदाय या पेशे को दोषी ठहराने के बजाय सुरक्षित व्यवहार, नियमित जांच, समय पर उपचार और भेदभाव-मुक्त स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देना जरूरी है।

एक दिवसीय कार्यशाला में एचआईवी नियंत्रण पर मंथन
छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति और भारतीय जनस्वास्थ्य संस्थान (PHFI) के संयुक्त सहयोग से अंबिकापुर में एचआईवी/एड्स को लेकर एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेएस सरुता रहे।
कार्यशाला में एचआईवी संक्रमण की मौजूदा स्थिति, रोकथाम के उपायों, समय पर जांच, नियमित उपचार और जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि संक्रमण की पहचान में देरी और उपचार की निरंतरता में कमी रोकथाम के प्रयासों को प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर नए संक्रमण और मौतों में आई कमी
कार्यशाला में प्रस्तुत राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 25.61 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवन जी रहे हैं। राहत की बात यह है कि वर्ष 2010 की तुलना में नए एचआईवी संक्रमणों में लगभग 49 प्रतिशत और एड्स संबंधी मौतों में 81 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।

इन आंकड़ों को एचआईवी नियंत्रण के क्षेत्र में उपचार और जागरूकता से मिली प्रगति के रूप में देखा गया। हालांकि, संक्रमण की रोकथाम के लिए नियमित जांच, समय पर उपचार और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
स्पा–मसाज केंद्रों में असुरक्षित यौन गतिविधियां चिंता का विषय
कार्यशाला में स्पा एवं मसाज केंद्रों की आड़ में होने वाली कथित असुरक्षित यौन गतिविधियों को भी चिंता का विषय बताया गया। दिल्ली राज्य एड्स नियंत्रण समिति के वर्ष 2022-23 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि स्पा सेंटरों में महिला समूह से जुड़े नौ और पुरुष मसाजकर्मियों से जुड़े 68 एचआईवी पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्पा या मसाज सेंटर में काम करने वाले कुछ कर्मचारी स्थानीय निवासी नहीं होते और कुछ समय बाद दूसरे स्थानों पर चले जाते हैं। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच, उपचार और फॉलो-अप सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मसाज, स्पर्श, गले मिलने या साथ खाना खाने से एचआईवी नहीं फैलता। संक्रमण का प्रमुख जोखिम असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित रक्त के संपर्क जैसी स्थितियों से जुड़ा है। इसलिए जागरूकता फैलाने के साथ जांच और उपचार की सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
नियमित उपचार से संक्रमण फैलने का जोखिम समाप्त हो सकता है
जिला एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने बताया कि आधुनिक एंटीरेट्रोवायरल उपचार (ART) की मदद से एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोग लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
उन्होंने बताया कि नियमित उपचार से रक्त में वायरस की मात्रा निर्धारित सीमा से नीचे और जांच में पता न चलने योग्य स्तर पर बनी रहने पर यौन संपर्क के माध्यम से एचआईवी संक्रमण नहीं फैलता। इस सिद्धांत को U=U यानी *Undetectable = Untransmittable* कहा जाता है। इसके लिए उपचार की निरंतरता और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है।
उचित चिकित्सकीय देखरेख और आवश्यक उपचार के माध्यम से एचआईवी संक्रमित दंपति के यहां एचआईवी मुक्त संतान होने की संभावना भी संभव है। उन्होंने गोपनीय जांच, नियमित उपचार और संक्रमित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव से मुक्त व्यवहार को जरूरी बताया।
भेदभाव नहीं, जागरूकता और जांच पर जोर
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि एचआईवी नियंत्रण के लिए किसी विशेष समुदाय या पेशे को कलंकित करने के बजाय जोखिम वाले व्यवहार की पहचान, सुरक्षित यौन व्यवहार को बढ़ावा देने, समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. जगदीश कुमार रेलवानी, चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. पीके सिन्हा, पीएचएफआई से उमेश राउत्रे एवं दीपक तिवारी, सीजी सेक से क्षितिज दीवान, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. चंद्रशेखर तिवारी और वीरेंद्र दुबे सहित विभिन्न जिलों के जिला स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी तथा दिशा टीम के सदस्य उपस्थित रहे।


