Durg News : दुर्ग जिले के गनियारी ग्राम में पंडवानी की विश्व प्रसिद्ध गायिका और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान डॉ. तीजन बाई के निधन के उपरांत उनके दशगात्र कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधि, उनके शिष्य, सहयोगी कलाकार और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी प्रिय कलाकार को अंतिम नमन किया।
भूपेश बघेल ने तीजन बाई के योगदान को किया नमन
मीडिया से रूबरू होते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भावुक होकर कहा कि डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत और विश्व में पंडवानी कला की अमिट छाप छोड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय कलाकार थीं। उन्होंने कहा कि आज गनियारी में उमड़ी हजारों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि लोग उन्हें कितना सम्मान और प्रेम करते थे। बघेल ने कहा, “जब तक पंडवानी कला जीवित रहेगी, तब तक डॉ. तीजन बाई का नाम पूरे सम्मान के साथ लिया जाएगा।” उन्होंने उनके द्वारा कला के क्षेत्र में किए गए कार्यों को अमूल्य बताते हुए कहा कि उनका जाना कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
राजनीतिक मोर्चा: भूपेश बघेल का साय सरकार पर कड़ा प्रहार
श्रद्धांजलि सभा के इतर, मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की साय सरकार पर तीखे राजनीतिक हमले भी किए। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा के मानसून सत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार किसानों की बुनियादी समस्याओं—खाद, बीज और बिजली—के प्रति पूरी तरह उदासीन है। बघेल ने बताया कि कांग्रेस ने इन समस्याओं को लेकर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये और असंतोषजनक जवाब के कारण कांग्रेस को सदन का बहिष्कार करने पर मजबूर होना पड़ा।
खाद-बीज और बिजली संकट पर सरकार को घेरा
भूपेश बघेल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रदेश का किसान खाद, बीज और बिजली की किल्लत से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से समस्याओं के समाधान के बजाय केवल सलाह देने का काम किया जा रहा है, जिससे किसान परेशान हैं। बघेल ने सरकार से मांग की कि वह धरातल पर काम करे और किसानों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराए। गनियारी में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा ने जहाँ एक ओर कला की महान विभूति को याद किया, वहीं राजनीतिक गलियारों में बघेल के बयानों ने राज्य की वर्तमान सरकार के खिलाफ माहौल को गर्मा दिया है। यह कार्यक्रम कला के प्रति समर्पण और राज्य के वर्तमान राजनीतिक मुद्दों का एक मिला-जुला केंद्र बना रहा।
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