Trump US Iran Deal : वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से जारी कड़े सैन्य और राजनैतिक गतिरोध को समाप्त करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार एक ऐतिहासिक शांति समझौता स्थापित हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महा-समझौते की पुष्टि करते हुए आधिकारिक बयान दिया है कि दोनों देश अब एक मजबूत और स्थायी डील के फ्रेमवर्क पर पूरी तरह सहमत हो चुके हैं।

जी-7 (G-7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस पहुंचे राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि इस शांति समझौते पर डिजिटल माध्यम से दोनों पक्षों के दस्तखत हो चुके हैं। अब इस डील पर औपचारिक और अंतिम रूप से आमने-सामने हस्ताक्षर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में किए जाएंगे। इस पूरे समझौते में दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह खोले जाने पर टिकी हैं, जिसे फिलहाल आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है।

107 दिनों के भीषण युद्ध का अंत
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रेस वार्ता में एक बड़ी जानकारी साझा करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से मालवाहक जहाज, जिनमें से कई जहाजों पर भारी मात्रा में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) लदा हुआ है, अब सुरक्षित रूप से गुजरने लगे हैं। यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 107 दिनों से चले आ रहे विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने के लिए डिजिटल शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के ठीक एक दिन बाद देखने को मिला है।
ज्ञात हो कि दोनों देशों के बीच जंग छिड़ने की वजह से मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) क्षेत्र का यह बेहद संवेदनशील और आर्थिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने की कगार पर आ गई थी। राष्ट्रपति ने भरोसा जताया है कि यह समुद्री रास्ता आगामी शुक्रवार (19 जून) से वैश्विक व्यापार के लिए “पूरी तरह खोल” दिया जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट आंशिक रूप से बहाल
फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक द्विपक्षीय बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और उसे खोले जाने के वैश्विक मसले पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि वैश्विक व्यापार के लिए इस समुद्री रास्ते को खुला रखने के लिए हमें अब किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्ति की बहुत ज्यादा मदद की जरूरत पड़ने वाली है।”
इससे पहले ब्रिटेन और फ्रांस (लंदन और पेरिस) ने इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक मिशन गठित करने का प्रस्ताव रखा था। ट्रंप ने आगे स्पष्ट किया कि यह जलमार्ग “पहले ही आंशिक रूप से खुल चुका है,” हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अभी इस बात की बारीकी से जांच-पड़ताल कर रही हैं कि पानी के भीतर कहीं कोई खतरनाक बारूदी सुरंगें (माइंस) तो नहीं रह गई हैं। ईरान के साथ हुई इस डील की सबसे बड़ी खूबी बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “इस समझौते की सबसे अहम बात यह है कि ईरान के पास अब भविष्य में कभी भी कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे।”
ईरान के नए नेतृत्व के साथ सुधरे वाशिंगटन के रिश्ते
गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए एक भीषण हमले के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस घटना का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस बड़े बदलाव के बाद वाशिंगटन के तेहरान में उभरे नए शासन और नेतृत्व के साथ काफी “अच्छे और व्यावहारिक” संबंध बन रहे हैं। ट्रंप ने बेहद तीखे अंदाज में कहा, “ईरानी नेताओं का पहला क्रूर समूह चला गया, जिसके बाद उनका दूसरा समूह भी सत्ता से हट गया और अब जो तीसरा समूह सत्ता में आया है, वह हमें बेहद समझदार लगा और अंततः हमने इसी नए नेतृत्व के साथ यह शांति समझौता फाइनल कर लिया है।” हालांकि, उन्होंने खुलकर उन ईरानी नेताओं के नामों का खुलासा नहीं किया।
मध्य पूर्व में शांति की नई सुबह
आने वाले दिनों की उम्मीदों पर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने सकारात्मक लहजे में कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि अब बहुत जल्द मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) के पूरे इलाके में बहुत सी अच्छी और शांतिपूर्ण चीजें होने वाली हैं।” इसके साथ ही उन्होंने कूटनीतिक रूप से यह भी साफ कर दिया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले इस ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति समझौते के मुख्य समारोह में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और आमने-सामने की बैठक में हस्ताक्षर करेंगे।
हालांकि, उन्होंने सुरक्षा कारणों से जेनेवा में होने वाले इस समारोह के सटीक स्थान की घोषणा नहीं की। इस महा-समझौते के हस्ताक्षर समारोह में खुद राष्ट्रपति ट्रंप व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे या नहीं, इस सीधे सवाल पर उन्होंने सस्पेंस बनाए रखते हुए कहा, “यह पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करता है, हो सकता है कि मैं इसमें खुद शामिल होऊं, या यह भी हो सकता है कि मैं वहां न जाऊं।” इसके साथ ही उन्होंने जेनेवा जाने वाले उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में शामिल अन्य विशिष्ट अधिकारियों के नामों का खुलासा करने से भी पूरी तरह इनकार कर दिया।











