IAEA Iran : अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA के संचालक मंडल के लिए प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है। इसमें ईरान पर परमाणु अप्रसार संबंधी दायित्वों का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए उसका मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भेजने की मांग की गई है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव पर अभी बातचीत जारी है।
NPT के तहत ईरान की कानूनी जिम्मेदारी
परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान अपने सभी परमाणु पदार्थों और गतिविधियों की जानकारी देने के लिए बाध्य है। इसके साथ ही उसे IAEA के निरीक्षकों को यह सत्यापित करने की अनुमति भी देनी होती है कि परमाणु सामग्री का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के अलावा किसी अन्य काम में नहीं हो रहा है।
जून 2025 में बढ़ा था परमाणु विवाद
इस कूटनीतिक पहल पर जून 2025 से विचार किया जा रहा है। उस समय IAEA के संचालक मंडल ने करीब दो दशक में पहली बार आधिकारिक तौर पर माना था कि ईरान अपने परमाणु अप्रसार संबंधी दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है। इसके ठीक एक दिन बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे।
सुरक्षा परिषद में जाने के बाद बढ़ेंगे विकल्प
यदि ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा जाता है, तो आगे की कार्रवाई का अधिकार परिषद के पास होगा। परिषद प्रतिबंध लगाने, संपत्तियां जब्त करने या अन्य कानूनी रूप से बाध्यकारी कदम उठाने पर विचार कर सकती है। हालांकि, ईरान के सहयोगी रूस और चीन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो अधिकार है, इसलिए कड़े दंडात्मक कदम की संभावना सीमित मानी जा रही है।
IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी को प्रस्ताव
एपी द्वारा देखे गए और पहले रॉयटर्स द्वारा प्रकाशित मसौदे में IAEA महानिदेशक राफेल ग्रोसी से संबंधित प्रावधानों के तहत प्रस्ताव और पहले पारित प्रस्तावों को एजेंसी के सभी सदस्यों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा को भेजने का अनुरोध किया गया है।
कूटनीतिक समाधान पर भी जोर
प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से पैदा होने वाली चुनौतियों और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता पर उसके प्रभाव का कूटनीतिक समाधान निकालने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसा समझौता तलाशना है, जो ईरान की परमाणु गतिविधियों से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं का समाधान कर सके। सभी पक्षों से कूटनीतिक प्रक्रिया में रचनात्मक भागीदारी की अपील की गई है।
प्रस्ताव पर अभी जारी है बातचीत
राजनयिकों के मुताबिक, मसौदा अभी अंतिम रूप में नहीं है और IAEA के संचालक मंडल के सामने औपचारिक रूप से पेश नहीं किया गया है। सदस्य देश इसमें बदलाव या संशोधन का सुझाव दे सकते हैं। औपचारिक प्रस्तुति के बाद प्रस्ताव पर अगले सप्ताह वियना में होने वाली संचालक मंडल की बैठक में मतदान प्रस्तावित है।
IAEA निरीक्षकों की पहुंच पर विवाद
जून 2025 में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद तेहरान ने प्रभावित परमाणु स्थलों तक IAEA निरीक्षकों की पहुंच रोक रखी है। एजेंसी का कहना है कि परमाणु अप्रसार संधि के तहत ईरान उसके साथ सहयोग करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
यूरेनियम भंडार को लेकर IAEA की चिंता
IAEA जून 2025 की बमबारी के बाद से ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार की स्थिति का सत्यापन नहीं कर सकी है। एजेंसी की हालिया गोपनीय रिपोर्ट में निरीक्षकों को परमाणु स्थलों तक पहुंच और परमाणु पदार्थों के सत्यापन की अनुमति लगातार नहीं मिलने को परमाणु प्रसार के जोखिम से जोड़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम है।
10 परमाणु बम की क्षमता पर चेतावनी
IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी ने पिछले वर्ष एपी को दिए साक्षात्कार में कहा था कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का सैन्य इस्तेमाल करने का निर्णय लेता है, तो मौजूदा भंडार से वह 10 परमाणु बम तक बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया था कि इसका अर्थ यह नहीं है कि ईरान के पास वर्तमान में परमाणु हथियार मौजूद हैं।
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