Indian Air Force : भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन यानी SAT-SAAW खरीदने का फैसला किया है। इन हथियारों की खरीद के लिए भारत डायनमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ 810.79 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया है। यह सौदा ‘बाय इंडियन-इंडियनली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड’ यानी Buy Indian-IDDM श्रेणी के तहत किया गया है।
DRDO ने स्वदेशी तकनीक से किया हथियार का विकास
SAT-SAAW को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने देश में ही डिजाइन और विकसित किया है। इस हथियार में करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रक्षा उत्पादन में घरेलू तकनीक और भारतीय कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह सौदा देश में विकसित आधुनिक हथियार प्रणालियों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जगुआर, हॉक और Su-30 MKI से किया जा सकता है लॉन्च
SAT-SAAW एक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसीजन गाइडेड ग्लाइड बम है। इसे भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख लड़ाकू और सैन्य विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। इनमें जगुआर, हॉक और Su-30 MKI जैसे विमान शामिल हैं। इसकी डिजाइन इस तरह की गई है कि विमान अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी से जमीन पर मौजूद महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बना सके।
दुश्मन के एयरफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाया जा सकता है निशाना
इन हथियारों का इस्तेमाल दुश्मन के महत्वपूर्ण एयरफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ किया जा सकता है। इनमें रनवे, टैक्सी ट्रैक, हैंगर, रडार और अन्य अहम सैन्य सुविधाएं शामिल हैं। SAT-SAAW के शामिल होने से वायुसेना की लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है।
2027-28 से शुरू होगी SAT-SAAW की डिलीवरी
सरकार और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी जानकारी के मुताबिक SAT-SAAW की डिलीवरी वित्त वर्ष 2027-28 से शुरू होकर 2028-29 तक जारी रहने की योजना है। 160 हथियारों के साथ उनसे जुड़े उपकरण भी इस अनुबंध का हिस्सा हैं। इन प्रणालियों के वायुसेना में शामिल होने के बाद लंबी दूरी के प्रिसीजन स्ट्राइक मिशन के लिए उसकी क्षमताओं में विस्तार होने की संभावना है।
रक्षा मंत्रालय ने ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने की बात कही
रक्षा मंत्रालय के अनुसार SAT-SAAW को शामिल किए जाने से भारतीय वायुसेना की बिना किसी बाधा के ऑपरेशन जारी रखने की क्षमता मजबूत होगी। मंत्रालय ने इसे देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने वाला कदम बताया है। SAT-SAAW और संबंधित उपकरणों की खरीद के अनुबंध पर दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में भारत डायनमिक्स लिमिटेड के साथ हस्ताक्षर किए गए।
भारतीय वायुसेना लगातार आधुनिक हो रही
भारतीय वायुसेना अपनी युद्धक और ऑपरेशनल क्षमताओं को लगातार आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। इसके तहत सटीक हमला करने वाले हथियारों, आधुनिक सेंसर और नई तकनीक से लैस प्रणालियों को शामिल किया जा रहा है। SAT-SAAW जैसे हथियार वायुसेना को लंबी दूरी से लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में अतिरिक्त क्षमता प्रदान कर सकते हैं।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
SAT-SAAW का स्वदेशी विकास और Buy Indian-IDDM श्रेणी के तहत इसकी खरीद भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति से भी जुड़ी है। घरेलू डिजाइन, विकास और निर्माण पर जोर देने से भारतीय रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इस तरह के सौदे देश में उन्नत सैन्य तकनीक विकसित करने और रक्षा जरूरतों के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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