IIIT student arrested : छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) विभाग के छात्र सैय्यद रहीम पर आरोप है कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग कर 36 छात्राओं की 1000 से अधिक अश्लील तस्वीरें बनाई हैं। आरोपी छात्र को पुलिस ने बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल व पेन ड्राइव जब्त की गई है।



इवेंट्स में खींची गईं फोटो का किया दुरुपयोग
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कॉलेज के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए छात्राओं की तस्वीरें खींचता था। इन तस्वीरों को उसने AI टूल्स की मदद से अश्लील रूप में परिवर्तित कर दिया। कुछ आपत्तिजनक फोटो अपने दोस्तों को भी दिखाए, जिनके माध्यम से बात छात्राओं तक पहुंची। इसके बाद छात्राओं ने मामले की शिकायत कॉलेज प्रशासन से की।

प्रबंधन ने पहले FIR नहीं की, छात्राओं से मीडिया तक पहुंचा मामला
छात्राओं की शिकायत पर कॉलेज प्रबंधन ने आरोपी को सस्पेंड तो कर दिया, लेकिन पुलिस को तत्काल सूचना नहीं दी। जब मामला छात्राओं के बीच से मीडिया तक पहुंचा, तब जाकर कॉलेज प्रबंधन ने राखी थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने IPC और IT एक्ट की धाराओं 67, 67A और 66(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जांच के लिए बनाई गई महिला स्टाफ की विशेष समिति
कॉलेज प्रशासन ने इस गंभीर मामले को देखते हुए महिला स्टाफ की एक विशेष समिति गठित की है। यह समिति न केवल तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि कहीं यह डेटा सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफार्म पर लीक तो नहीं हुआ है। समिति की रिपोर्ट पुलिस के साथ साझा की जाएगी।

साइबर एक्सपर्ट ने जताई डेटा लीक की आशंका
साइबर क्राइम एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के अनुसार, वर्तमान में कई ऐसे AI एप्लीकेशन मौजूद हैं, जिनसे किसी की भी फोटो को अश्लील या आपत्तिजनक रूप में बदला जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे ऐप का डेटा अक्सर विदेशी सर्वर पर सेव होता है, जिससे इसका दुरुपयोग होने की पूरी संभावना रहती है।
IT एक्ट के तहत 5 साल तक की सजा संभव
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी की निजी तस्वीर से छेड़छाड़ कर उसे अश्लील बनाना या शेयर करना गंभीर अपराध है। IT एक्ट की धारा 67, 67A और 66(2) के तहत ऐसे मामलों में 3 से 5 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यह अपराध अज़मानतीय (non-bailable) श्रेणी में आता है।
UGC और पुलिस की अपील
UGC ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाएं और छात्रों को डिजिटल एथिक्स की ट्रेनिंग दें। साथ ही, इस तरह की किसी भी घटना की तुरंत पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी है, ताकि डिजिटल साक्ष्य को समय रहते जब्त किया जा सके।
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