Mahtari Vandan Yojana: छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत रजिस्टर्ड 5 लाख महिलाओं को 20वीं किश्त का भुगतान नहीं हुआ है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक और आधारहीन बताते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया है।

कांग्रेस का सवाल: 70 लाख में से 5 लाख महिलाएं कहां गईं?
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने दावा किया कि योजना के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 लाख महिलाओं को पहली किश्त सौंपी थी। हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा जारी की गई 20वीं किश्त में केवल 64,94,768 महिलाओं को ही पैसा ट्रांसफर किया गया। कांग्रेस का सवाल है कि बाकी 5 लाख महिलाएं योजना से बाहर कैसे हो गईं?

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि कई ऐसी महिलाएं, जिन्हें पूर्व में नियमित भुगतान हो रहा था, उन्हें भी इस बार किश्त नहीं मिली। कांग्रेस ने इस स्थिति को “सरकारी असफलता और अपारदर्शिता” का परिणाम बताया है।

भाजपा का जवाब: केवल पात्रों को ही मिलेगा लाभ
इस पर भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास आंकड़ों का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं है। सरकार की प्राथमिकता यह है कि पात्रता की समीक्षा कर केवल योग्य महिलाओं को ही योजना का लाभ मिले। उन्होंने बताया कि कई मामलों में दोहरे रजिस्ट्रेशन, अपूर्ण दस्तावेज और फर्जी आवेदन सामने आए हैं, जिसके चलते कुछ लाभार्थियों को फिलहाल सूची से बाहर किया गया है।
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि उनकी सरकार ने एक महीने में 70 लाख महिलाओं का डेटा इकट्ठा कर उन्हें समय पर भुगतान दिया है, जो एक दुनिया के सामने मिसाल है। उन्होंने कांग्रेस को “शर्म करने” की नसीहत दी और कहा कि पिछली सरकार में महिलाओं से केवल वादे किए गए, जबकि भाजपा सरकार ने उन्हें वास्तविक लाभ दिया है।

पात्रों को राशि नहीं रुकनी चाहिए: भाजपा
चिमनानी ने यह भी माना कि पात्र महिलाओं को राशि में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार रिव्यू प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है और हर पात्र महिला को योजना का लाभ मिलेगा। वहीं अपात्रों को सिस्टम से हटाया जाएगा, ताकि योजना का दुरुपयोग न हो।
महतारी वंदन योजना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो चुकी है। एक ओर कांग्रेस इसे सरकारी लापरवाही और लाभार्थियों की अनदेखी बता रही है, वहीं भाजपा पात्रता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देने की बात कह रही है। अब देखना होगा कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है और क्या सच में सभी पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिल पाता है या यह मुद्दा चुनावी राजनीति का हिस्सा बनकर रह जाएगा।










