Bihar SIR Case: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट कल (सोमवार, 8 सितंबर 2025) को महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), AIMIM समेत कई राजनीतिक दलों, एनजीओ और कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए याचिकाएं दायर की हैं।

निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में SIR प्रक्रिया की घोषणा की थी, जिसके तहत राज्य की पूरी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। आयोग के मुताबिक, राज्य में 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.5% ने आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए हैं। लेकिन कई राजनीतिक दल और संगठनों ने इस प्रक्रिया को गोपनीयता, पारदर्शिता और समयसीमा को लेकर चुनौती दी है।

क्या है मामला?
SIR के तहत चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की थी, और दावा-आपत्तियों के लिए 1 सितंबर तक का समय तय किया गया था। इस प्रक्रिया के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की कि: SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। कई वास्तविक मतदाता सूची से छूट गए हैं। दावे-आपत्तियों के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की अब तक की टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल हैं, ने कहा कि इस मुद्दे से “बड़े पैमाने पर विश्वास का संकट” उत्पन्न हुआ है।कोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह कानूनी स्वयंसेवकों की नियुक्ति करे, जो मतदाताओं और राजनीतिक दलों को मसौदा सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने में मदद करें।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन का विकल्प उपलब्ध कराया जाए ताकि अधिकतम लोग भागीदारी कर सकें।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता का बचाव करते हुए कहा है कि: 99.5% मतदाताओं ने प्रक्रिया में हिस्सा लिया है। आयोग ने समयसीमा बढ़ाने का विरोध किया है क्योंकि मसौदा सूची की वैधता को बनाए रखना जरूरी है। आयोग ने यह भी बताया कि 30 अगस्त तक कुल 22,723 दावे और 1,34,738 आपत्तियां प्राप्त हुईं। चुनाव आयोग के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित की जाएगी।
आज की सुनवाई में क्या है अहम?
आज सुप्रीम कोर्ट में: चुनाव आयोग की टिप्पणियों पर राजनीतिक दलों के जवाबों पर विचार किया जाएगा। संबंधित जिला न्यायाधीशों को सौंपी गई गोपनीय रिपोर्टों पर चर्चा होगी। यह तय होगा कि क्या SIR प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत है या उसमें संशोधन किया जाए।
बिहार में मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक भागीदारी पर बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है, जो यह तय करेगी कि बिहार के करोड़ों मतदाताओं का भविष्य किस तरह से सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित किया जा सकता है।
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