Sonam Wangchuk : नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा किया गया 26 दिनों का अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वांगचुक ने सरकार से बातचीत और लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त किया। इसके बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां कुछ नेताओं ने इस कदम का स्वागत किया, वहीं विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार और वांगचुक के बीच हुई बातचीत को लेकर सवाल उठाए हैं।

इमरान मसूद ने उठाए बातचीत की पारदर्शिता पर सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सोनम वांगचुक और सरकार के बीच हुई वार्ता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की मौजूदगी के बिना हुई बातचीत पूरी तरह पारदर्शी नहीं कही जा सकती। इमरान मसूद का कहना था कि जिस आंदोलन की शुरुआत छात्रों से जुड़े मुद्दे को लेकर हुई थी, उस पर होने वाली चर्चा में छात्रों की भागीदारी भी होनी चाहिए थी। उन्होंने सरकार और वांगचुक के बीच हुई बातचीत की प्रक्रिया पर स्पष्टता की मांग की।

‘अन्ना हजारे पार्ट टू’ वाली टिप्पणी पर चर्चा
इमरान मसूद ने अपने बयान में सोनम वांगचुक की तुलना सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से भी की। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह स्थिति “अन्ना हजारे पार्ट टू” जैसी प्रतीत होती है। मसूद ने आरोप लगाया कि अनशन समाप्त करने का फैसला छात्रों के हितों से अधिक सरकार के साथ समझौते का परिणाम है। हालांकि, यह कांग्रेस सांसद का राजनीतिक आरोप है और इस संबंध में सोनम वांगचुक की ओर से ऐसी टिप्पणी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भाजपा सांसद ने सरकार की पहल का किया समर्थन
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक देशहित से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंतित रहे हैं और सरकार ने भी पेपर लीक मामले में तेजी से कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और भविष्य में नीट परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में बयान की मांग की
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि सरकार इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखना चाहती है, तो प्रधानमंत्री को संसद में आकर बयान देना चाहिए। खड़गे ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक चर्चा का सर्वोच्च मंच है और ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर वहीं विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, संसद में दिया गया बयान अधिक जवाबदेह और प्रभावी माना जाएगा।
कांग्रेस और सपा ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस छात्रों के मुद्दों को लगातार उठाती रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने भी छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखा है और सरकार के रवैये को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि समस्या की जड़ को समाप्त किए बिना केवल तात्कालिक उपायों से समाधान संभव नहीं है। उन्होंने अपने बयान में सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए पेपर लीक जैसे मामलों पर व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई।
26 दिन बाद समाप्त हुआ अनशन
सोनम वांगचुक ने गुरुवार रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त किया। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में उन्होंने अपना उपवास तोड़ा। सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद अनशन समाप्त होने के बावजूद, नीट पेपर लीक, परीक्षा सुधार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस अभी भी जारी है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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