IND vs AFG 2nd T20I : भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने स्वीकार किया है कि बाहरी आलोचनाओं और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं का खिलाड़ियों पर असर पड़ता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि समय के साथ उन्होंने ऐसे शोर को संभालना सीख लिया है। अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में भारत ने सात विकेट से जीत दर्ज कर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली।
सैमसन ने टीम हित में मुश्किल फैसलों का समर्थन किया
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैमसन ने टीम के ‘टीम-फर्स्ट’ नजरिए का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के लिए लगातार रन बनाना आसान नहीं है और जब टीम के लक्ष्य को प्राथमिकता दी जाती है, तो खिलाड़ियों को कई बार कठिन फैसलों को स्वीकार करना पड़ता है।
वैभव सूर्यवंशी के चयन का दिया उदाहरण
सैमसन ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए बताया कि आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। सैमसन ने कहा कि जब वह दो-तीन मैचों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके और सूर्यवंशी शानदार फॉर्म में थे, तब टीम की सीरीज जीतने की कोशिश को देखते हुए नेतृत्व समूह का फैसला उचित था।
आईपीएल कप्तानी ने फैसलों को समझने में की मदद
57 रन की पारी खेलने वाले सैमसन ने कहा कि आईपीएल फ्रेंचाइजी के कप्तान के तौर पर उनके अनुभव ने उन्हें नेतृत्व के कठिन फैसलों को समझने में मदद की है। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों और नेतृत्व समूह के बीच स्पष्ट बातचीत बेहद जरूरी होती है। इससे टीम के फैसलों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है।
गौतम गंभीर के साथ बातचीत को बताया महत्वपूर्ण
सैमसन ने बताया कि इंग्लैंड टी20 सीरीज के दौरान और मौजूदा सीरीज से पहले उनकी मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ कई बार बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि लोकप्रिय फैसला लेना आसान होता है, लेकिन नेतृत्व समूह को कई बार टीम के हित में कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। सैमसन ने इसके लिए टीम के नेतृत्व समूह को श्रेय दिया।
आलोचनाओं से बचने के लिए रखते हैं दूरी
बाहरी आलोचना से निपटने के सवाल पर सैमसन ने कहा कि वह खुद को सोशल मीडिया और अनावश्यक टिप्पणियों से दूर रखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह कभी-कभी ‘वाई-फाई बंद’ करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमेंट्स और वरिष्ठ खिलाड़ियों की प्रतिक्रियाएं फिर भी सामने आ जाती हैं।
बोले- क्रिकेटर रोबोट नहीं होते
सैमसन ने साफ कहा कि आलोचनाओं का असर उन पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेटर मशीन या रोबोट नहीं हैं और शुरुआत में नकारात्मक टिप्पणियां खराब जरूर लगती हैं। हालांकि, अनुभव ने उन्हें ऐसी परिस्थितियों को बेहतर ढंग से संभालना सिखाया है। वह खुद से बातचीत कर अपनी पहचान और जिम्मेदारी याद करते हैं।
वर्ल्ड कप जीत ने बढ़ाया आत्मविश्वास
सैमसन ने दबाव से निपटने में भारत की वर्ल्ड कप जीत को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह लगातार आलोचनाओं के बारे में सोचते रहते, तो मैदान पर स्वतंत्र होकर शॉट नहीं खेल पाते। इसके बजाय उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर पर भरोसा और मिली उपलब्धियों के लिए आभार बनाए रखा।
आक्रामक टी20 क्रिकेट पर कायम है टीम
भारतीय बल्लेबाज ने कहा कि टीम पिछले दो-तीन वर्षों से आक्रामक टी20 क्रिकेट के तरीके पर भरोसा करती आई है। उनका फोकस पावरप्ले में ज्यादा से ज्यादा रन बनाने और गेंद को देखकर सकारात्मक क्रिकेट खेलने पर है। सैमसन के मुताबिक, हार खेल का हिस्सा है, इसलिए खिलाड़ियों को अपने तरीके पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
बाहरी शोर नजरअंदाज कर प्रदर्शन पर ध्यान
सैमसन ने अंत में कहा कि भारतीय क्रिकेटर होने के नाते हार के बाद काफी आलोचना झेलनी पड़ती है। लेकिन उनका अनुभव उन्हें इन चीजों से आगे बढ़ने में मदद करता है। वह बाहरी शोर को नजरअंदाज कर आत्मविश्वास बनाए रखने और मैदान पर तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं। अब भारत 17 सितंबर को सीरीज में क्लीन स्वीप पूरा करने के इरादे से उतरेगा।
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