UPI MDR Supreme Court : 2,000 रुपये से अधिक के कमर्शियल UPI लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर अब कानूनी चुनौती सामने आई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका के जरिए वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी की गई गजट अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने संबंधित अधिसूचनाओं पर रोक लगाने का अनुरोध भी अदालत से किया है।
वित्त मंत्रालय की दोनों गजट अधिसूचनाओं पर उठाए सवाल
याचिका में वित्त मंत्रालय द्वारा सितंबर में जारी की गई दोनों गजट अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन अधिसूचनाओं के माध्यम से कमर्शियल UPI लेनदेन पर शुल्क से जुड़ी व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है। इसी व्यवस्था को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब इस मामले में अदालत के समक्ष अधिसूचनाओं की वैधता और शुल्क व्यवस्था से जुड़े मुद्दे रखे गए हैं।
अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दाखिल की याचिका
यह याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दाखिल की गई है। अंजन दत्ता के अनुसार, 14 सितंबर को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके बाद प्रस्तावित शुल्क किस प्रकार लागू किए जाएंगे, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। उनका कहना है कि इसी शुल्क व्यवस्था और संबंधित अधिसूचनाओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में अदालत से इन अधिसूचनाओं पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है।
शुल्क व्यवस्था के असर को लेकर याचिकाकर्ता की दलील
याचिका में शुल्क को लेकर सरकार की ओर से दिए जा सकने वाले तर्कों पर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह कहा जा सकता है कि प्रस्तावित शुल्क की राशि बहुत कम है और UPI प्लेटफॉर्म के संचालन तथा रखरखाव के लिए इसकी आवश्यकता है। हालांकि, याचिकाकर्ता का तर्क है कि शुल्क सीधे तौर पर प्लेटफॉर्म या कारोबारियों पर लगाए जाने की स्थिति में भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
कैश भुगतान बढ़ने की आशंका जताई गई
याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में यह भी कहा है कि यदि UPI लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है तो इससे डिजिटल भुगतान के व्यवहार पर असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, अतिरिक्त शुल्क की वजह से कुछ कारोबारी या ग्राहक नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे कैश में लेनदेन बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि, यह याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रखी गई दलील है और इसके प्रभाव का अंतिम आकलन न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
केंद्र सरकार समेत कई संस्थाएं बनाई गईं प्रतिवादी
याचिका में केंद्र सरकार के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI को भी प्रतिवादी बनाया गया है। इसके साथ ही यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI से संबंधित पक्षों को भी मामले में शामिल किया गया है। याचिकाकर्ता ने इन सभी पक्षों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी आपत्तियां रखी हैं।
दोनों अधिसूचनाओं को निरस्त करने की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी की गई दोनों गजट अधिसूचनाओं को निरस्त करने का अनुरोध किया है। साथ ही संबंधित शुल्क व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। अब इस मामले में अदालत के समक्ष याचिका पर सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखेंगे। UPI से जुड़े शुल्क का यह मामला डिजिटल भुगतान व्यवस्था और उससे जुड़े कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
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