Independence Day 2025: आज भारत अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12वीं बार देश को संबोधित कर रहे हैं। यह परंपरा देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1947 में शुरू की गई थी, जब उन्होंने पहली बार तिरंगा फहराकर लाल किले की प्राचीर से आजाद भारत को संबोधित किया था।
दिल्ली सदियों से भारत की सत्ता, संस्कृति और संघर्ष का केंद्र रही है। मुगल सम्राट शाहजहां ने 1648 में दिल्ली को शाहजहांबाद नाम देकर राजधानी बनाया और उसी समय लाल किले का निर्माण करवाया। लाल किला न केवल मुग़ल सल्तनत का शक्ति-स्रोत था, बल्कि यह भारत की पहचान बन गया।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाल किला क्रांतिकारियों और मुगलों के लिए प्रतिरोध का केंद्र बन गया। क्रांति असफल होने के बाद अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर लिया और किले को मिलिट्री कैंप में बदल दिया। यह किला अब गुलामी का प्रतीक बन चुका था।
1947 में जब भारत ने आजादी की ओर कदम बढ़ाया, तो 14-15 अगस्त की मध्यरात्रि को पंडित नेहरू ने संविधान सभा में ऐतिहासिक “Tryst with Destiny” (नियति से साक्षात्कार) भाषण दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत अब अपने भविष्य का निर्धारण स्वयं करेगा।
15 अगस्त को उन्होंने प्रिंसेस पार्क में पहला तिरंगा फहराया, लेकिन 16 अगस्त को उन्होंने पहली बार लाल किले से देश को संबोधित करते हुए कहा, “मैं देश का प्रथम सेवक हूं।” यह संबोधन केवल सत्ता संभालने की औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक नए युग की शुरुआत थी।
लाल किले से हर साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन एक राष्ट्रीय परंपरा बन चुका है। यह परंपरा केवल झंडारोहण या भाषण देने तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरे देश के लिए एकजुटता, संकल्प और उपलब्धियों का प्रतीक है। यह वह क्षण होता है जब भारत अपनी आजादी की कीमत, उसकी यात्रा और आगे के संकल्पों को याद करता है।
“Tryst with Destiny” केवल एक भाषण नहीं, बल्कि आजादी की घोषणा और भविष्य के निर्माण का घोषणापत्र था। इसका आशय था कि भारतीयों ने एक वादा किया है – अपनी नियति से, अपने इतिहास से, और अपने भविष्य से – कि वे एक स्वतंत्र, समावेशी और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो देश के 14वें प्रधानमंत्री हैं, आज लाल किले से अपना 12वां संबोधन दे रहे हैं। उनका संबोधन इस बार “नया भारत” थीम पर आधारित है। यह साल इसलिए भी खास है क्योंकि लाल किले पर “ऑपरेशन सिंदूर” की झलक देखने को मिलेगी। साथ ही, इस बार समारोह में 5000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें सफाईकर्मी, ग्राम सरपंच, अग्निवीर और शहीदों के परिजन शामिल हैं।
लाल किला मुगलों की शक्ति का प्रतीक था, जो अब आजादी का पर्याय बन चुका है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसकी दीवारों ने क्रांतिकारियों की गूंज सुनी है।
आज यह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता और शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
लाल किला केवल ईंटों और पत्थरों की एक संरचना नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतिबिंब है। यह भारत की उस यात्रा का साक्षी है जो गुलामी से आज़ादी, और फिर लोकतंत्र तक पहुंची। प्रधानमंत्री मोदी का 12वां संबोधन इस यात्रा की एक और कड़ी है – जो देश को “नए भारत” की ओर अग्रसर करता है।
हर साल 15 अगस्त को जब लाल किले से तिरंगा फहराया जाता है, तो यह न केवल आजादी की याद दिलाता है, बल्कि यह भी चेताता है कि स्वतंत्रता की रक्षा करना और उसे सार्थक बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
Read More : India Independence 1947 : कानपुर की आंखों से देखी गई आज़ादी की पहली रात, 14 अगस्त 1947 का ऐतिहासिक जश्न
IPL 2026 Captains List: दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिकेट लीग, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के…
LPG Tanker Shivalik: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थितियों के बीच भारत…
Raipur Cafe Fight: राजधानी के मुख्य रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित 'कैफे लाइट' शुक्रवार और…
Balrampur Opium: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में बड़े पैमाने पर सामने आई अवैध अफीम की…
Chhattisgarh Police: छत्तीसगढ़ के नवगठित और संवेदनशील जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के…
Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक केंद्र सिलतरा में उस वक्त हड़कंप मच…
This website uses cookies.