India China Border : हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र को लेकर कुछ खबरें मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई थीं। इन दावों में कहा गया था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने भारतीय सीमा के भीतर घुसपैठ की है और वहां अस्थायी कैंप स्थापित किए हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इससे स्थानीय चरागाह और पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली जमीन प्रभावित हो रही है।

इन दावों का संज्ञान लेते हुए भारतीय सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। सेना ने स्पष्ट रूप से कहा है कि घुसपैठ और कैंप बनाए जाने से जुड़ी ये रिपोर्टें पूरी तरह से भ्रामक, गलत और आधारहीन हैं। सेना ने यह भी सुनिश्चित किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति पर पूरी तरह से कड़ी निगरानी रखी जा रही है और वहां सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद व सक्रिय है।

अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत का रुख सदैव से स्पष्ट और अडिग रहा है। भारत सरकार और भारतीय सेना का मानना है कि अरुणाचल प्रदेश देश का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। किसी भी विदेशी ताकत या बाहरी दावे से भारत की संप्रभुता और क्षेत्र पर उसके अधिकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता। भारत अपनी सीमावर्ती अखंडता को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी प्रकार के अवैध दावे को कभी स्वीकार नहीं किया गया है।
सीमा पर स्थिति स्थिर लेकिन संवेदनशील: थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी
थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारत-चीन सीमा की स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर फिलहाल स्थिति स्थिर बनी हुई है, हालांकि यह क्षेत्र अभी भी संवेदनशील है और यहां लगातार सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। जनरल द्विवेदी ने बताया कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच जमीनी स्तर पर समन्वय बनाए रखने के लिए हर साल 1,100 से अधिक बार बातचीत होती है, जो गलतफहमियों को दूर करने और सीमा संबंधी नियमित मुद्दों के समाधान में मददगार साबित होती है।
डिसएंगेजमेंट समझौतों से जमीनी स्तर पर आई स्थिरता
सेनाध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच सैनिकों की वापसी (डिसएंगेजमेंट) को लेकर जो समझौते हुए हैं, उन्होंने जमीनी हकीकत में काफी स्थिरता पैदा की है। जनरल द्विवेदी ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि अब दोनों पक्ष एक-दूसरे की रणनीतिक चिंताओं के प्रति पहले की तुलना में अधिक संवेदनशीलता दिखा रहे हैं। ज्ञात हो कि भारत और चीन के बीच लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है, जिसे लेकर दोनों देशों की समझ अलग-अलग है। अक्सर जिन क्षेत्रों को भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, चीन उन पर अपने दावे करता है और चीन के दावों पर भारत कड़ा विरोध दर्ज कराता रहा है।
सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर निगरानी
कुल मिलाकर, भारतीय सेना का संदेश स्पष्ट है कि वह सीमा पर किसी भी प्रकार के अनधिकृत बदलाव को रोकने में पूरी तरह सक्षम है। ऊपरी दावों के विपरीत, वास्तविक स्थिति यह है कि भारतीय सेना की मुस्तैदी से सीमावर्ती इलाकों में शांति बनी हुई है। सरकार और सैन्य नेतृत्व द्वारा लगातार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सीमा से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर रखी जाए ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक की कोई गुंजाइश न रहे।
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