India vs Pakistan : एशिया कप 2025 के प्रमुख मुकाबले में रविवार को भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमें दुबई के मैदान पर आमने-सामने होंगी। यह मैच क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांचक होगा, लेकिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के घाव झेल रहे परिवारों के लिए यह दिन भारी सवाल लेकर आया है। इन परिवारों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद देश को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है, तब तक खेल के नाम पर भी कोई रिश्ते नहीं होने चाहिए।

भारत-पाक मुकाबले पर आपत्ति
पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति और बेटे को खो चुकीं किरण यतीश परमार ने इस भारत-पाक मुकाबले पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “यह मैच बिल्कुल नहीं होना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहती हूं कि जब ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है, तब पाकिस्तान से मैच क्यों कराया जा रहा है?” यतीश परमार ने पूरे देशवासियों से अपील की है कि वे उन परिवारों से मिलें जिन्होंने इस भयंकर हमले में अपने प्रियजनों को खोया है, तभी उन्हें उस दर्द का अहसास होगा जो हम झेल रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे घाव अभी तक भरे नहीं हैं।”

पहलगाम आतंकी हमले के परिवारों की पीड़ा
पहलगाम आतंकवादी हमले में अपने पिता और भाई को खो चुके सावन परमार ने भी इस मैच को लेकर दुख और सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “अगर सच में क्रिकेट मैच खेलना है तो पहले मेरा 16 साल का भाई वापस लाकर दिखाइए, जिसे गोलियों से छलनी कर दिया गया था।” सावन का कहना है कि खेल के लिए ऐसा कदम तभी उठाना चाहिए जब देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन पूरा हो जाए।
ये बयान उन कई परिवारों की आवाज हैं जो आतंकवाद की त्रासदी से जूझ रहे हैं और मानते हैं कि आतंकवाद के चलते हुए नुकसान को भुला कर भारत-पाक क्रिकेट मुकाबला आयोजित करना सही नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद का साया
“ऑपरेशन सिंदूर” जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाया जा रहा सैन्य अभियान है। सरकार ने इस ऑपरेशन के तहत आतंकियों को पकड़ने और क्षेत्र को शांतिपूर्ण बनाने के लिए कठोर कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में क्रिकेट जैसे खेल के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच नजदीकियों की बात करना विवादित हो जाता है।
खेल और राजनीति: क्या है सही?
भारत-पाकिस्तान के बीच खेल को अक्सर द्विपक्षीय संबंधों में तनाव को कम करने का जरिया माना जाता है। लेकिन जब राष्ट्र सुरक्षा और नागरिकों की जान जोखिम में हो, तो इस तरह के मैचों पर सवाल उठना लाजमी है। पहलगाम हमले की त्रासदी ने इस बात को फिर से उजागर किया है कि खेल के मंच पर दोस्ती की उम्मीद रखना तब मुश्किल है जब जमीन पर रिश्ते जटिल और संवेदनशील हों।
एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान मैच खेला जाना खेल प्रेमियों के लिए उत्साह का विषय है, लेकिन आतंकवादी हमलों से प्रभावित परिवारों की भावनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और देश आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ रहा है। ऐसे में इन परिवारों का दर्द समझना और उन्हें सम्मान देना जरूरी है। खेल की गरिमा और देश की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।










