Trump warning India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने पर भारत को दी गई चेतावनी और 50 प्रतिशत टैरिफ़ की सज़ा के बाद अब बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर भारत दबाव में आकर रूस से तेल आयात बंद कर दे, तो उसकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा? इसका जवाब हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसमें चेताया गया है कि रूस से तेल खरीद बंद करने पर भारत को 2025-26 में 9 अरब डॉलर (लगभग 79,000 करोड़ रुपये) और 2026-27 में 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है।

ट्रंप की सख्ती और भारत पर असर
ट्रंप ने भारत पर रूस के साथ व्यापार जारी रखने के चलते 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इससे भारत के कई उत्पादों की अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ जाएगी और निर्यात पर असर पड़ सकता है। लेकिन अगर भारत ट्रंप की चेतावनी को गंभीरता से लेकर रूस से तेल लेना बंद कर देता है, तो ईंधन की लागत में जबरदस्त वृद्धि होगी। इसका सीधा असर मुद्रास्फीति, डॉलर-रुपया विनिमय दर, सब्सिडी खर्च और घरेलू बाजार की स्थिरता पर पड़ेगा।

रूस से सस्ता तेल, भारत की राहत
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने भारत को वैश्विक कीमतों से काफी नीचे कच्चा तेल बेचना शुरू किया। 30 जून से 1 अगस्त 2025 के बीच भारत ने औसतन 65.66 डॉलर प्रति बैरल की दर से रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो अंतरराष्ट्रीय दरों की तुलना में काफी सस्ता था। इसका सीधा फायदा भारत की थोक महंगाई दर और खुदरा महंगाई दर पर पड़ा, जिससे आम जनता को राहत मिली और सरकार का तेल सब्सिडी खर्च भी सीमित रहा।
रूस से नहीं, तो कहां से?
अगर भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना पड़ा, तो उसके पास इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे विकल्प हैं। लेकिन इन देशों से तेल या तो महंगा है या फिर राजनीतिक शर्तों और भौगोलिक आपूर्ति सीमाओं से जुड़ा हुआ है। साथ ही, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पहले से तनाव में है। ऐसे में यदि सभी देश रूस से तेल खरीद बंद कर दें, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है।
ट्रंप की धमकी-रणनीति या दबाव?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख सिर्फ एक कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। वे चुनावी साल में अमेरिका के हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं और भारत जैसे सहयोगी देशों पर दबाव बनाकर व्यापार संतुलन में सुधार लाना चाहते हैं। हालांकि, भारत ने अब तक इस धमकी पर कोई नरम रुख नहीं दिखाया है।
भारत का जवाब-राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
भारत का रुख साफ है कि वह अपनी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों और आर्थिक विवेक के आधार पर तय करता है, न कि बाहरी दबावों के आधार पर। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करता है, लेकिन रूस पर अभी अमेरिकी या संयुक्त राष्ट्र के ऐसे कोई प्रतिबंध नहीं हैं जो भारत को तेल खरीद से रोकें।
रूस से सस्ता तेल भारत के लिए सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी लाभकारी रहा है। ट्रंप की चेतावनी के दबाव में आकर तेल आयात बंद करना भारत को कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत में झोंक सकता है, जिससे घरेलू बाजार, बजट और महंगाई पर बड़ा असर पड़ेगा। ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह संतुलित कूटनीति अपनाए और अपने दीर्घकालिक ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखे।










