India Russia Oil Import : यूरोपीय थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (CREA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत मई 2026 में भी रूस से जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) खरीदने के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अकेले मई के महीने में रूस से लगभग 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) मूल्य के हाइड्रोकार्बन का आयात किया है. इस कुल आयात में सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का रहा, जो लगभग 83 प्रतिशत यानी 4.8 अरब यूरो दर्ज किया गया. इसके अतिरिक्त, भारत ने 550 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पादों और 429 मिलियन यूरो के रूसी कोयले का भी आयात किया.

घरेलू रिफाइनरियों में बढ़ी आवक
मई महीने में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महीने-दर-महीने 8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी मुख्य वजह रूस से होने वाली सप्लाई में 21 प्रतिशत का उछाल आना है. गुजरात के वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में रूसी तेल की अनलोडिंग 36 प्रतिशत और जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में 14 प्रतिशत बढ़ गई है. वहीं, ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने मई 2026 में पिछले दो वर्षों का अपना सबसे अधिक रूसी कच्चा तेल अनलोड करने का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने भी, जिन्होंने नवंबर 2025 में आयात रोक दिया था, मार्च 2026 से दोबारा रूसी तेल की खरीद में भारी तेजी दिखाई है.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर
यूक्रेन पर रूस के सैन्य आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है. यूरोपीय देशों द्वारा दूरी बनाने के बाद भारत रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी तेल का सबसे बड़ा कूटनीतिक और व्यापारिक खरीदार बनकर उभरा है. इस सस्ते कच्चे तेल की बदौलत भारतीय रिफाइनरियों को न केवल घरेलू स्तर पर ऊर्जा लागत कम करने में मदद मिली है, बल्कि वे वैश्विक बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर अपना मुनाफा भी तेजी से बढ़ा रही हैं.
वैश्विक खरीदारों की सूची
रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का आधा हिस्सा (50 प्रतिशत) अकेले चीन द्वारा खरीदा जा रहा है, जिससे वह रूस की आय का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है. चीन ने मई में रूस से कुल 7 अरब यूरो का जीवाश्म ईंधन आयात किया. इस सूची में भारत 36 प्रतिशत की मजबूत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर मजबूती से जमा हुआ है. इसके बाद तुर्किये ने 6 प्रतिशत और कड़े प्रतिबंधों का दावा करने वाले यूरोपीय संघ (EU) ने भी सीधे तौर पर 5 प्रतिशत रूसी कच्चे तेल का आयात किया है.
प्रतिबंधों के बीच कूटनीतिक रास्ता
CREA की रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल से तैयार उत्पाद कूटनीतिक रास्तों से यूरोपीय संघ और अमेरिकी बाजारों तक धड़ल्ले से पहुंच रहे हैं. भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की जिन रिफाइनरियों में रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल होता है, उन्होंने मई 2026 में प्रतिबंध लगाने वाले देशों को 641 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद बेचे. इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी से तैयार ईंधन भी शामिल है, जिसे अमेरिका और यूरोपीय बंदरगाहों तक पहुंचाया गया. यह साफ तौर पर दर्शाता है कि प्रतिबंधों के बाद भी वैश्विक बाजार को रूसी तेल से पूरी तरह अलग करना नामुमकिन साबित हो रहा है.













