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Indian Army Day 2026: जब पाकिस्तान की कैद में था बेटा, फील्ड मार्शल करियप्पा के एक जवाब ने दुश्मन को भी कर दिया था दंग

Indian Army Day 2026:  आज 15 जनवरी 2026 को पूरा राष्ट्र गर्व के साथ अपना 78वां भारतीय सेना दिवस मना रहा है। यह दिन भारतीय सैन्य इतिहास के उस स्वर्णिम क्षण की याद दिलाता है जब भारतीय सेना का नेतृत्व पूरी तरह से भारतीय हाथों में आया था। 15 जनवरी 1949 को ही लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से सेना की कमान संभालकर आजाद भारत के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने का गौरव प्राप्त किया था। आज का दिन न केवल शक्ति प्रदर्शन का है, बल्कि उन वीर बलिदानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी है, जिन्होंने सीमाओं की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

1965 का युद्ध और केसी करियप्पा का अदम्य साहस

फील्ड मार्शल करियप्पा के राष्ट्रप्रेम की मिसाल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देखने को मिली। उनके पुत्र केसी करियप्पा भारतीय वायुसेना में पायलट थे। युद्ध के दौरान वे अपने हंटर विमान से दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर रहे थे। इसी बीच लाहौर के पास एक हमले के दौरान उनके विमान पर दुश्मन की गोलाबारी हुई, जिससे विमान में आग लग गई। केसी करियप्पा को विमान से इजेक्ट करना पड़ा, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई और पाकिस्तानी सेना ने उन्हें युद्धबंदी (POW) बना लिया।

जनरल करियप्पा का वह जवाब जिसने राष्ट्रपति अयूब खान को चौंकाया

उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान थे, जो विभाजन से पहले करियप्पा के अधीन काम कर चुके थे। जैसे ही उन्हें पता चला कि उनके पूर्व कमांडर का बेटा कैद में है, उन्होंने सम्मानवश जनरल करियप्पा को फोन किया और केसी करियप्पा को तुरंत रिहा करने की पेशकश की। इस पर जनरल करियप्पा ने ऐतिहासिक जवाब देते हुए कहा, “वह अब सिर्फ मेरा बेटा नहीं, बल्कि भारत माँ का बेटा है। पाकिस्तान की जेल में बंद हर भारतीय सैनिक मेरा बेटा है। उसके साथ वही व्यवहार करो जो अन्य युद्धबंदियों के साथ करते हो। यदि छोड़ना है तो सबको छोड़ो, मेरे बेटे के लिए कोई विशेष रियायत नहीं चाहिए।” उनके इस कठोर और नैतिकता से भरे जवाब ने दुश्मन देश के राष्ट्रपति को निरुत्तर कर दिया।

इंदौर से फील्ड मार्शल तक का शानदार सफर

फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा का जन्म 1899 में कर्नाटक के कुर्ग (कोडागु) में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा मद्रास से पूरी की और 1919 में उन चुनिंदा भारतीयों में शामिल हुए जिन्हें इंदौर के डेली कॉलेज में सैन्य प्रशिक्षण के लिए चुना गया था। करियप्पा ने भारतीय सेना में करीब तीन दशक तक अपनी सेवा दी और 1953 में सेवानिवृत्त हुए। रिटायरमेंट के बाद वे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भारत के उच्चायुक्त भी रहे। उनके असाधारण योगदान के सम्मान में 1986 में भारत सरकार ने उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ की पांच सितारा रैंक प्रदान की।

सेना दिवस का महत्व और राष्ट्र का संकल्प

15 जनवरी का दिन हमें अनुशासन, वीरता और निष्पक्षता की याद दिलाता है। करियप्पा ने न केवल सेना को आधुनिक बनाया, बल्कि जाति और धर्म से ऊपर उठकर ‘भारतीयता’ के जज्बे को फौज में भरा। आज की सेना भी उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में शुमार है। सेना दिवस के अवसर पर दिल्ली के परेड ग्राउंड सहित देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहाँ जांबाज सैनिक अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं और देश को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हैं।

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