Dollar vs Rupee
Dollar vs Rupee: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी गहराते तनाव और युद्ध की आशंकाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। वैश्विक मुद्रा बाजार में मची हलचल के बीच भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन की शुरुआत भारतीय मुद्रा के लिए बेहद निराशाजनक रही। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा बाजार को संभालने के तमाम प्रयासों के बावजूद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे और टूटकर 92.37 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Forex Market) में शुक्रवार सुबह रुपया 92.33 प्रति डॉलर के भाव पर खुला। लेकिन बाजार की नकारात्मक धारणा के चलते इसमें सुधार होने के बजाय और गिरावट आई और यह 92.37 के स्तर को छू गया। एक दिन पहले, यानी गुरुवार को भी रुपये में भारी कमजोरी देखी गई थी, जब यह 92.36 तक गिरकर अंत में 92.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार दो दिनों की इस गिरावट ने आयातकों और विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों की चिंता बढ़ा दी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की इस बदहाली के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया का संघर्ष है। इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बजाय उछाल देखा जा रहा है, जिससे भारत का ‘इम्पोर्ट बिल’ (आयात बिल) बढ़ रहा है। रुपये पर दबाव बनाने वाले कुछ अन्य मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
मजबूत अमेरिकी डॉलर: वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर भाग रहे हैं।
FII की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
डॉलर इंडेक्स में उछाल: छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दिखाने वाला ‘US Dollar Index’ 99.77 के स्तर पर पहुंच गया है।
रुपये की कमजोरी का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 560.06 अंक यानी 0.74% गिरकर 75,474.36 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (Nifty 50) भी 184.45 अंक यानी 0.78% फिसलकर 23,454.70 पर पहुंच गया। बाजार में मची इस अफरा-तफरी से निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत में 4.99 प्रतिशत की भारी बढ़त देखी गई है, जिससे यह 96.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कच्चे तेल का महंगा होना सीधे तौर पर रुपये की वैल्यू को कम करता है। शेयर बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को अकेले 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। भारी बिकवाली के इस दौर ने भारतीय बाजार की लिक्विडिटी और रुपये की साख दोनों को प्रभावित किया है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम नहीं होता है, तो रुपया 95 के स्तर को भी छू सकता है। आरबीआई लगातार बाजार में दखल दे रहा है और डॉलर की सप्लाई बढ़ा रहा है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के आगे ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें आम जनता की जेब पर और बोझ डाल सकती हैं।
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