IndiGo News : फ्लाइट का समय बदलने और टर्मिनल परिवर्तन की समय पर सूचना नहीं देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इंडिगो एयरलाइंस के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने एयरलाइन की सेवा को उपभोक्ता सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए कुल 60 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि समय पर एयरपोर्ट पहुंचने के बावजूद यात्री निर्धारित उड़ान नहीं पकड़ सका, जिससे उसे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। आयोग ने एयरलाइन को 45 दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

यात्री ने दर्ज कराई थी उपभोक्ता आयोग में शिकायत
यह मामला रायपुर निवासी अधिवक्ता अमितेश पाठक से जुड़ा है। उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि वे अपने परिवार के साथ देहरादून यात्रा के बाद 31 मार्च 2015 को दिल्ली से रायपुर लौटने वाले थे। इसके लिए उन्होंने नवकार कम्युनिकेशन एजेंसी के माध्यम से इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट का टिकट बुक कराया था। टिकट के अनुसार उड़ान दिल्ली के टर्मिनल-3 से रवाना होने वाली थी और उन्होंने उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाई थी।

समय बदला, लेकिन टर्मिनल बदलने की सूचना नहीं मिली
अमितेश पाठक के अनुसार, यात्रा से पहले उनके मोबाइल फोन पर केवल फ्लाइट का समय बदलने का संदेश प्राप्त हुआ था। हालांकि, उड़ान के टर्मिनल में हुए बदलाव की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। जब वे निर्धारित समय पर टर्मिनल-3 पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि फ्लाइट वास्तव में टर्मिनल-1 से संचालित की जा रही है। दोनों टर्मिनलों के बीच पर्याप्त दूरी होने के कारण वे समय रहते नए टर्मिनल तक नहीं पहुंच सके और उनकी फ्लाइट छूट गई।
फ्लाइट छूटने से बढ़ी परेशानी
फ्लाइट छूट जाने के बाद अमितेश पाठक और उनके परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्हें पूरी रात दिल्ली एयरपोर्ट के लाउंज में बितानी पड़ी क्योंकि उसी दिन रायपुर जाने के लिए कोई अन्य उपयुक्त उड़ान उपलब्ध नहीं थी। इस अप्रत्याशित स्थिति के कारण परिवार को अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ा और उनकी यात्रा योजना पूरी तरह प्रभावित हो गई।
नई टिकट खरीदने में करना पड़ा अतिरिक्त खर्च
अगले दिन रायपुर लौटने के लिए अमितेश पाठक और उनके परिवार को नई फ्लाइट का टिकट खरीदना पड़ा। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त 21,135 रुपये खर्च करने पड़े। उनका कहना था कि यदि एयरलाइन समय रहते टर्मिनल बदलने की सही जानकारी उपलब्ध करा देती, तो यह अतिरिक्त खर्च और परेशानी से बचा जा सकता था। इसी आधार पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान एयरलाइन की ओर से नहीं हुआ प्रभावी पक्ष प्रस्तुत
उपभोक्ता आयोग में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत किए। वहीं आयोग ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि सुनवाई के दौरान एयरलाइन की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी ढंग से उपस्थित नहीं हुआ। उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर आयोग ने माना कि एयरलाइन ने यात्री को समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उसे नुकसान उठाना पड़ा।
आयोग ने माना सेवा में स्पष्ट कमी
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला उपभोक्ता सेवा में स्पष्ट कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का उदाहरण है। आयोग ने माना कि किसी भी एयरलाइन की जिम्मेदारी है कि वह यात्रियों को उड़ान के समय, टर्मिनल और अन्य महत्वपूर्ण बदलावों की सही एवं समय पर जानकारी दे। ऐसा न करने से यात्रियों को अनावश्यक परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
45 दिनों में भुगतान करने का निर्देश
आयोग ने इंडिगो एयरलाइंस को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 45 दिनों के भीतर 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करे। इसके अतिरिक्त 10 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय के लिए भी भुगतान करने होंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो एयरलाइन को इस रकम पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इस फैसले को उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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