War for Hormuz
War for Hormuz : मिडिल-ईस्ट में शांति की उम्मीदों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब मध्यस्थता के लिए चल रही वार्ता विफल हो गई। उसी दिन ईरान ने एक सनसनीखेज फुटेज जारी कर दुनिया को चौंका दिया, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा और गहरा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को कथित तौर पर हालिया घटनाक्रम बताया जा रहा है। फुटेज में ईरानी नौसेना अत्यंत आक्रामक अंदाज में अमेरिकी युद्धपोत को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) से दूर रहने की चेतावनी दे रही है। ईरान का दावा है कि उसने अपनी सैन्य शक्ति के दम पर अमेरिकी नौसेना को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया है।
ईरान के कई दूतावासों और आधिकारिक चैनलों द्वारा इस फुटेज को वैश्विक स्तर पर प्रसारित किया गया है। हालांकि, अमेरिका ने ईरान के इन दावों की पुष्टि नहीं की है। इसके विपरीत, वाशिंगटन ने एक अलग बयान जारी करते हुए दावा किया कि उसके दो युद्धपोतों ने हॉर्मुज क्षेत्र में शांतिपूर्वक बारूदी सुरंगे हटाने (Mine Sweeping) का ऑपरेशन चलाया। अमेरिका का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया थी और किसी भी सैन्य दबाव की बात निराधार है। दोनों देशों के बयानों में यह विरोधाभास इस समुद्री मार्ग की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है।
तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी नौसेना अब इस रास्ते से किसी भी जहाज को प्रवेश करने या बाहर निकलने की अनुमति नहीं देगी। ट्रंप का यह रुख ईरान की उस कथित योजना के विरोध में आया है, जिसमें ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर वसूलने और केवल ‘चुनिंदा’ जहाजों को ही अनुमति देने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और अवैध वसूली करार देते हुए कड़े सैन्य एक्शन की चेतावनी दी है।
ईरानी मीडिया द्वारा जारी किए गए 60 सेकंड के इस वीडियो में बेहद तनावपूर्ण संवाद सुना जा सकता है। वीडियो में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का एक कमांडर रेडियो पर अमेरिकी युद्धपोत 121 को संबोधित करते हुए कहता है, “यह सेपाह नौसेना स्टेशन है। आपको तुरंत अपना रास्ता बदलना होगा और हिंद महासागर की ओर लौटना होगा। यदि आपने इस चेतावनी का पालन नहीं किया, तो आप पर हमला कर निशाना बनाया जाएगा।” इसके जवाब में अमेरिकी पक्ष से आवाज आती है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गठबंधन सेना के रूप में मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। इस पर ईरान की ओर से तीन बार चिल्लाकर कहा जाता है— “यह अंतिम चेतावनी है!”
ईरानी नौसेना ने केवल युद्धपोतों को ही नहीं, बल्कि ओमान सागर में मौजूद सभी जहाजों को भी सतर्क किया है। संदेश में कहा गया है कि “अगर आसपास कोई युद्धपोत दिखाई दे, तो उससे कम से कम 10 किलोमीटर की दूरी बनाए रखें।” ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने समुद्री क्षेत्र में किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं करेगा और बिना किसी पूर्व चेतावनी के उन पर गोली चलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आक्रामकता परमाणु मुद्दे पर विफल हुई वार्ता का सीधा परिणाम मानी जा रही है।
इधर, डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि परमाणु मुद्दे पर आयोजित बैठक के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई है। उन्होंने ईरान की टोल वसूली की योजना को ‘गैर जरूरी वसूली’ बताते हुए कहा कि जो कोई भी ईरान को इस मार्ग के लिए भुगतान करेगा, उसे खुले समुद्र में अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा या अनुमति नहीं मिलेगी। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिकी सेना सही समय पर ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म करने के लिए तैयार है। फिलहाल, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने प्रभावी रूप से बंद करने की कोशिश की है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।
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