Majid Khadmi Death
Majid Khadmi Death : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के लिए एक बेहद विचलित करने वाली खबर सामने आई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शक्तिशाली खुफिया प्रमुख, मेजर जनरल मजीद खादमी की आज (6 अप्रैल, 2026) सुबह एक सैन्य हमले में मौत हो गई। यह हमला अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का परिणाम बताया जा रहा है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस खबर की पुष्टि कर दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की लपटें और तेज होने की आशंका गहरा गई है। इस हाई-प्रोफाइल मौत ने तेहरान के सुरक्षा ढांचे को हिलाकर रख दिया है।
ईरान की विशिष्ट सैन्य इकाई IRGC ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल के माध्यम से इस घटना की जानकारी साझा की है। अपनी पोस्ट में IRGC ने खादमी को ‘शहीद’ बताते हुए लिखा कि वे आज सुबह अमेरिकी-इजरायली बलों द्वारा किए गए एक ‘आतंकवादी हमले’ का शिकार हुए। दूसरी ओर, इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कार्ट्ज ने इस ऑपरेशन की सफलता की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि इजरायली सेना ने सटीक हमले में IRGC के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक को ढेर कर दिया है। यह हमला ईरान की खुफिया क्षमताओं पर एक सीधा प्रहार माना जा रहा है।
मजीद खादमी ईरान के सैन्य तंत्र में एक अनुभवी और प्रभावशाली व्यक्ति थे। उन्हें जून 2023 में खुफिया विभाग की कमान सौंपी गई थी। उनकी नियुक्ति उस दौर में हुई थी जब इजरायल ने ईरान के पूर्व खुफिया प्रमुख मोहम्मद काजमी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को एक हमले में मार गिराया था। इंटेलिजेंस चीफ बनने से पहले, खादमी रक्षा मंत्रालय में खुफिया सुरक्षा संगठन के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। उन्हें ईरान के शीर्ष नेतृत्व का बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था। जासूसी और रणनीतिक गतिविधियों में उनके लंबे अनुभव के कारण वे इजरायल और अमेरिका की हिट-लिस्ट में शीर्ष पर थे।
जहाँ एक तरफ शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत से जंग भड़की हुई है, वहीं दूसरी ओर पर्दे के पीछे शांति समझौते की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने मिलकर एक युद्ध विराम (सीजफायर) का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मध्यस्थों के जरिए संबंधित पक्षों तक पहुंचाया गया है। यदि इस प्रस्ताव पर आम सहमति बनती है, तो अगले 15 से 20 दिनों के भीतर मध्य पूर्व में गोलाबारी थम सकती है। इस प्रस्ताव में सबसे महत्वपूर्ण शर्त ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने और क्षेत्र में सभी प्रकार के हमलों को तुरंत रोकने की रखी गई है।
सीजफायर के इस संभावित प्रस्ताव पर ईरान ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। तेहरान के आधिकारिक सूत्रों ने जानकारी दी है कि शांति का यह प्रस्ताव पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से पेश किया गया है। हालांकि, ईरान ने अपनी शर्तों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। तेहरान का कहना है कि किसी भी प्रकार के ‘अस्थायी’ सीजफायर के दौरान वे होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए नहीं खोलेंगे। ईरान की यह शर्त अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार के लिहाज से चिंता का विषय बनी हुई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या खादमी की मौत के बाद ईरान बदले की कार्रवाई करता है या शांति की मेज पर लौटता है।
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