Iran-Israel War Day 7
Iran-Israel War Day 7: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब अपने सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। एक ओर ईरान मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल पर भी बमबारी जारी है। हालांकि, अमेरिका और इजरायल की संयुक्त जवाबी कार्रवाई ने ईरान के भीतर तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। तेहरान सहित ईरान के प्रमुख शहरों में आसमान से मौत बरस रही है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इजरायली और अमेरिकी हमलों में ईरान के 1400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिससे मानवीय संकट गहरा गया है।
युद्ध के भीषण दौर के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक बयान वैश्विक राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। जब एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या रूस और चीन इस युद्ध में सक्रिय रूप से ईरान की सैन्य मदद कर रहे हैं, तो अराघची ने सीधे ‘हां’ या ‘ना’ कहने के बजाय कहा, “उन्होंने (रूस और चीन) हमेशा हमारी मदद की है।” जब इस पर विस्तार से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कूटनीतिक रुख अपनाते हुए कहा कि वे युद्ध के बीच रणनीतिक विवरण साझा नहीं करेंगे। इस बयान ने पश्चिम देशों की चिंता बढ़ा दी है कि क्या यह युद्ध एक बड़े वैश्विक टकराव का रूप ले सकता है।
अमेरिकी वायुसेना ने ईरान पर अपने हमले अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और घातक कर दिए हैं। तेहरान के अलावा सनंदज, बुकान, बुशहर और कजविन जैसे शहरों को निशाना बनाकर जबरदस्त एयर स्ट्राइक की गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने विशेष रूप से ईरान के मिलिट्री बेस, मिसाइल डिपो और लॉन्चिंग साइट्स को तबाह करने पर ध्यान केंद्रित किया है। तेहरान में IRGC के ठिकानों पर $B-2$ और $B-52$ बॉम्बर विमानों के जरिए 2000 पाउंड के वजनी बम गिराए गए हैं। यहाँ तक कि राजधानी के प्रसिद्ध आजादी फुटबॉल स्टेडियम और IRIB की संचार इमारतों को भी निशाना बनाया गया है, जिससे ईरान का रेडियो और टीवी प्रसारण ठप हो गया है।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लैविट ने आज एक आधिकारिक प्रेस वार्ता में दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की कमर तोड़ दी है। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि अमेरिका ने अब तक ईरान की 73% ड्रोन क्षमता और 86% बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। लैविट ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि ईरान पर्दे के पीछे से बातचीत की कोशिशें कर रहा है, लेकिन अमेरिका किसी भी तरह के गुप्त समझौते (Secret Negotiation) के पक्ष में नहीं है। अमेरिका का स्पष्ट संदेश है कि जब तक ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता, तब तक हवाई हमले जारी रहेंगे।
हवाई हमलों ने ईरान के भीतर न केवल सैन्य नुकसान पहुँचाया है, बल्कि नागरिक जीवन को भी अस्त-व्यस्त कर दिया है। ईरान के ऊर्जा मंत्री ने पुष्टि की है कि बमबारी के कारण देश में बिजली और पानी की आपूर्ति का गंभीर संकट पैदा हो गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति सीमावर्ती इलाकों में है, जहाँ सुरक्षा चौकियां तबाह होने के बाद ईरान की पकड़ कमजोर हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन इलाकों में कुर्द लड़ाकों की सक्रियता बढ़ सकती है, जिससे ईरान को अब विदेशी हमलों के साथ-साथ एक आंतरिक जमीनी युद्ध का सामना भी करना पड़ सकता है। यदि कुर्द लड़ाके सीमा पार कर ईरान में दाखिल होते हैं, तो तेहरान के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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