Iran Maritime Blockade
Iran Maritime Blockade : मध्य पूर्व में तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए उसके बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की पूर्ण समुद्री नाकेबंदी शुरू कर दी है। इस सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक सुरक्षा और तेल आपूर्ति मार्गों पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।
अमेरिकी सैन्य तैयारियों के केंद्र में इस समय विशाल जंगी जहाज USS त्रिपोली (LHA 7) है। इसे विशेष रूप से अरब सागर में तैनात किया गया है। USS त्रिपोली की खासियत यह है कि इसे पारंपरिक ‘वेल डेक’ के बिना डिजाइन किया गया है, जिससे इस पर अधिक संख्या में विमानों को रखा जा सकता है। वर्तमान में इस पर 5वीं पीढ़ी के सबसे घातक फाइटर जेट्स F-35B लाइटनिंग II और MV-22 ओस्प्रे (Ospreys) तैनात हैं। युद्ध जैसी स्थितियों में यह जहाज 20 से अधिक स्टील्थ फाइटर जेट्स को संचालित करने की क्षमता रखता है, जो ईरान की हवाई और समुद्री सीमा पर नजर रखने के लिए पर्याप्त हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि यह नाकेबंदी भारतीय समयानुसार शाम करीब 7:30 बजे से प्रभावी हो गई है। सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी और अरब खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से निकलने वाले सभी जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले उन जहाजों को नहीं रोका जाएगा जो गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल ईरान की आर्थिक और सैन्य रसद को पूरी तरह से ठप करना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाकेबंदी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी ईरानी ‘फास्ट अटैक क्राफ्ट’ अमेरिकी घेराबंदी के करीब आने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत और क्रूरता के साथ नष्ट कर दिया जाएगा। ट्रंप ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान ईरान की नौसेना का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 158 जहाज) पहले ही तबाह होकर समुद्र की तलहटी में पहुंच चुका है। उन्होंने ईरानी नौसेना की तुलना ड्रग डीलरों से करते हुए कहा कि अमेरिका उनके खिलाफ वैसी ही त्वरित कार्रवाई करेगा जैसी वह समुद्र में तस्करों के खिलाफ करता है।
यह कठोर कदम तब उठाया गया है जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आयोजित उच्च स्तरीय शांति वार्ता विफल हो गई। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल थे, किसी समझौते पर पहुंचने की उम्मीद में वहां गए थे। जब यह कूटनीतिक प्रयास किसी डील में तब्दील नहीं हो सका, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का आदेश जारी कर दिया। कूटनीति की विफलता ने अब सीधे सैन्य टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में नाकेबंदी की सफलता की तुलना नशीली दवाओं के खिलाफ अमेरिकी अभियान से की। उन्होंने दावा किया कि समुद्र के रास्ते अमेरिका में आने वाली 98.2% ड्रग्स को सफलतापूर्वक रोक दिया गया है। इसी तर्ज पर, वे ईरान की समुद्री गतिविधियों को शून्य पर लाना चाहते हैं। 15 से अधिक युद्धपोतों की यह तैनाती दर्शाती है कि अमेरिका इस बार ईरान को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में पूरी तरह से अलग-थलग करने के लिए सैन्य बल का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा। इस कार्रवाई के बाद अब पूरी दुनिया की निगाहें ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
Read More : Weather Update 2026: उत्तर भारत में भीषण लू का टॉर्चर, पूर्वोत्तर में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी
Amit Shah Jalpaiguri rally : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच केंद्रीय गृह…
INDIA Alliance : संसद के आगामी विशेष सत्र और 'संविधान संशोधन विधेयक 2026' को लेकर…
Tamil Nadu politics 2026 : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष…
Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के मुहाने पर खड़ी भारतीय जनता पार्टी…
Hormuz security mission : अमेरिका और ईरान के बीच पिछले एक महीने से जारी भीषण…
Chhattisgarh UCC committee : छत्तीसगढ़ की राजनीति में बुधवार का दिन एक बड़े बदलाव की…
This website uses cookies.