Iran attack NATO base:
Iran attack NATO base: मध्य पूर्व में जारी जंग अब अपने सबसे खतरनाक और आत्मघाती दौर में पहुँच गई है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल से अपने सुप्रीम लीडर की मौत का बदला लेने के लिए प्रतिशोध की सभी सीमाओं को लांघ दिया है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने तुर्की स्थित नाटो (NATO) के रणनीतिक ‘इंसर्लिक एयर बेस’ को निशाना बनाया है। यह हमला इसलिए भी डरावना है क्योंकि इस बेस पर बड़ी संख्या में अमेरिकी परमाणु हथियारों के होने की बात कही जाती है। इस स्ट्राइक ने न केवल क्षेत्रीय युद्ध को भड़काया है, बल्कि पूरी दुनिया के सामने परमाणु तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है।
ईरान इस समय केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि उन संवेदनशील जगहों को भी निशाना बना रहा है जहाँ से अमेरिका को सबसे बड़ी चोट पहुँच सके। दक्षिण तुर्की के अदाना के पास स्थित इंसर्लिक एयर बेस नाटो के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है। रक्षा विशेषज्ञों और ऐतिहासिक समझौतों के अनुसार, अमेरिका ने यहाँ सुरक्षा कवच के तौर पर लगभग 50 परमाणु बम (B61 Nuclear Bombs) स्टोर किए हुए हैं। ईरान का इन ठिकानों पर हमला करना इस बात का संकेत है कि वह अब किसी भी स्तर की तबाही के लिए तैयार है, भले ही इसके परिणाम वैश्विक परमाणु युद्ध के रूप में सामने आएं।
समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के अनुसार, शुक्रवार तड़के लगभग 3:25 बजे इंसर्लिक एयर बेस पर अचानक सायरन की आवाज सुनाई देने लगी। यह सायरन करीब 5 मिनट तक लगातार बजता रहा, जिसके बाद पूरे बेस पर ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने धमाकों की आवाजें सुनीं, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक नाटो के मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने इस हमले को इंटरसेप्ट कर हवा में ही नष्ट कर दिया। पूरे अदाना शहर में दमकल गाड़ियों और सुरक्षा बलों की आवाजाही बढ़ गई है। हालांकि तुर्की सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ईरान इस समय ‘इंतकाम’ के जुनून में डूबा हुआ है। उसने न केवल तुर्की में नाटो बेस को निशाना बनाया, बल्कि खाड़ी देशों में मौजूद लगभग सभी अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले तेज कर दिए हैं। इससे पहले ईरान ने इराक में स्थित फ्रांस के सैन्य बेस पर भी हमला किया था। ईरान का लक्ष्य खाड़ी के उन मुस्लिम देशों पर दबाव बनाना है जो अमेरिका और इजरायल को सैन्य सहयोग दे रहे हैं। 4 मार्च को भी तुर्की के हवाई क्षेत्र में ईरान की एक मिसाइल को नाटो की रक्षा प्रणाली ने मार गिराया था, जो बढ़ते तनाव की पहली बड़ी चेतावनी थी।
ईरान के इन हमलों के जवाब में इजरायल और अमेरिका ने भी ‘नॉन-स्टॉप’ ऑपरेशन शुरू कर दिया है। तेहरान और उसके आसपास के सैन्य अड्डों पर लगातार एयर स्ट्राइक की जा रही है। इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी बमों की बारिश कर दी है। दोनों तरफ से हो रही इस भीषण गोलाबारी ने मिडिल ईस्ट के नक्शे को बदलने की स्थिति पैदा कर दी है। ईरान की यह रणनीति कि वह परमाणु ठिकानों के पास हमला करे, अमेरिका को सीधे तौर पर युद्ध में पूरी तरह कूदने के लिए मजबूर कर सकती है।
इंसर्लिक एयर बेस पर हुआ यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। यदि ईरान के किसी हमले में परमाणु भंडार को जरा भी क्षति पहुँचती है, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। यह पर्यावरण और मानव जाति के लिए एक लाइलाज जख्म बन जाएगा। वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है, और परमाणु बमों के ऊपर गिरती मिसाइलें इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदी का संकेत दे रही हैं।
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