Middle East War 2026
Middle East War 2026: मध्य-पूर्व के रणक्षेत्र में तनाव अब अपने चरम बिंदु पर पहुंच गया है। ईरान ने अपने धुर विरोधी अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश देते हुए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को खोलने से दोटूक इनकार कर दिया है। इस घोषणा ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है, क्योंकि यह जलमार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। ईरान के इस सख्त रुख और लगातार बढ़ते सैन्य जमावड़े के बीच, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
ईरान की संसद के डिप्टी स्पीकर ने वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को फिलहाल किसी भी कीमत पर नहीं खोला जाएगा। उन्होंने उन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें अमेरिका के साथ गुप्त वार्ता की बात कही जा रही थी। डिप्टी स्पीकर ने स्पष्ट किया कि न तो वाशिंगटन के साथ कोई बातचीत हुई है और न ही भविष्य में ऐसी कोई योजना है। उन्होंने अपनी ही संसद के स्पीकर द्वारा पूर्व में दिए गए बातचीत से जुड़े बयानों को ‘निराधार’ और ‘भ्रामक’ करार देते हुए कहा कि ऐसे बयान केवल आंतरिक विवाद पैदा करने के लिए दिए गए हैं।
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में युद्ध और शांति से जुड़े संवेदनशील फैसलों पर अंतिम मुहर वहां के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) ही लगाते हैं। डिप्टी स्पीकर ने दोहराया कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार के समझौते या बातचीत की अनुमति फिलहाल सर्वोच्च नेता द्वारा नहीं दी गई है। इस बीच, ईरानी संसद ने होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन को लेकर एक विवादास्पद नई योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत, इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर भारी ‘टोल’ या शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ माना जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। चूंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर है, इसलिए इसकी बंदी से परिवहन लागत बढ़ गई है और महंगाई दर में उछाल आने की आशंका प्रबल हो गई है। वैश्विक वित्तीय संस्थान इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह संकट वैश्विक मंदी का कारण भी बन सकता है।
विदेश नीति के मोर्चे पर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार के संपर्क से इनकार किया है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स में किए जा रहे उन दावों को पूरी तरह गलत बताया जिनमें कहा गया था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। अराघची ने स्पष्ट किया कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, किसी भी स्तर पर बातचीत की कोई प्रक्रिया सक्रिय नहीं है। ईरान का यह रुख दर्शाता है कि वह फिलहाल कूटनीति के बजाय सैन्य और रणनीतिक दबाव बनाने की नीति पर चल रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिका ने भी अपने इरादे साफ कर दिए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी है कि सैन्य ऑपरेशन समाप्त होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खुला रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि या तो ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करना होगा, वरना अमेरिका समर्थित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बल प्रयोग के जरिए इस मार्ग को खुला रखना सुनिश्चित करेगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि अमेरिका दो से तीन हफ्तों के भीतर इस संघर्ष से बाहर निकल सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के हटने के बाद होर्मुज की स्थिति की जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी।
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