Crude Oil Price Drop : अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद वैश्विक कच्चे तेल बाजार में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बुधवार को क्रूड ऑयल की कीमत घटकर 77.51 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो हाल के महीनों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह स्तर फरवरी के अंत से पहले के युद्ध पूर्व स्तर के करीब माना जा रहा है। लगातार गिरावट के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं।

तीन महीनों के निचले स्तर पर पहुंचे तेल के दाम
पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी गई है, जिससे यह लगभग साढ़े तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों ही प्रमुख कच्चे तेल मानक भी नरमी के दौर से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 19 जून को अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक शांति समझौते के बाद कीमतों में और गिरावट संभव है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहरा असर पड़ सकता है।

युद्ध के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचे थे दाम
इससे पहले मार्च 2026 में जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 126 से 138 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसी अवधि में अमेरिकी WTI क्रूड भी 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चला गया था। उस समय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला था।
भारत के लिए राहत भरे संकेत, महंगाई पर असर संभव
कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश के आयात बिल और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। हाल के महीनों में तेल की बढ़ती कीमतों के कारण देश के राजकोषीय दबाव में भी वृद्धि हुई थी। अब कीमतों में नरमी से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहले हुई बढ़ोतरी
पिछले चार महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई थी। इस दौरान पेट्रोल के दाम में लगभग 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल में करीब 7.50 से 8 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई थी। इससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त दबाव पड़ा था।
एक दिन में 5 प्रतिशत तक गिरे थे कच्चे तेल के दाम
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 5 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय ब्रेंट क्रूड की कीमत 82 से 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई थी। जैसे ही युद्ध समाप्ति और शांति वार्ता की खबरें सामने आईं, शेयर बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला और भारतीय मुद्रा रुपये में भी मजबूती दर्ज की गई।
तेल कंपनियों पर बढ़ा वित्तीय दबाव
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार पिछले लगभग 109 से 110 दिनों में तेल कंपनियों को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। एक लीटर पेट्रोल पर करीब 3 रुपये और डीजल पर लगभग 27 रुपये तक की अंडर रिकवरी दर्ज की गई है। इसी तरह एलपीजी गैस सिलेंडर पर भी लगभग 700 रुपये तक का घाटा देखा गया, जिसके चलते सरकार को दो बार एलपीजी कीमतों में वृद्धि करनी पड़ी।
रोजाना करोड़ों का घाटा, अब राहत की उम्मीद
सरकारी सूत्रों के अनुसार हाल ही में तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर प्रतिदिन लगभग 650 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। हालांकि, अब कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट जारी रहती है तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है, हालांकि इसके लिए कुछ समय लग सकता है।
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