अंतरराष्ट्रीय

Iran-US War 2026: ईरान के गुप्त मिसाइल ठिकानों ने अमेरिका की नींद उड़ाई, क्या अब होगा महायुद्ध?

Iran-US War 2026:  मिडल ईस्ट में युद्ध की चिंगारी अब एक भीषण ज्वाला का रूप लेती दिखाई दे रही है। अमेरिकी सेना की बढ़ती तैनाती ने ईरान के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत के सामने ईरान भले ही कमज़ोर नजर आए, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ‘घायल’ ईरान अमेरिका और उसके सहयोगियों को गहरा जख्म देने की क्षमता रखता है।

वजूद की जंग: क्या है अमेरिका का संभावित टारगेट?

जैसे-जैसे अमेरिकी बेड़े ईरान की सीमाओं के करीब पहुंच रहे हैं, तेहरान के सैन्य और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यदि अमेरिका हमला करता है, तो उसके निशाने पर ईरान के शीर्ष नेता, सैन्य ठिकाने, रणनीतिक बुनियादी ढांचे और सबसे महत्वपूर्ण—उसकी न्यूक्लियर साइट्स होंगी। पिछले कुछ समय में इजरायली हमलों और आंतरिक विद्रोहों ने ईरान को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है, लेकिन जब बात वजूद पर बन आए, तो ईरान आत्मघाती कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

ईरान का ‘मिसाइल जखीरा’ और होर्मुज जलडमरूमध्य की धमकी

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही ईरान को पिछले साल भारी नुकसान हुआ हो, लेकिन उसके पास अभी भी सैकड़ों ऐसी मिसाइलें हैं जो इजरायल के किसी भी शहर को निशाना बना सकती हैं। ईरान के पास कम दूरी की मिसाइलों का एक विशाल भंडार है, जो खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों के लिए काल बन सकती हैं। इसके अलावा, ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रैट’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी है। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।

सुप्रीम लीडर की चेतावनी: “जंगी जहाजों को डुबो देगा ईरान”

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सीधे शब्दों में अमेरिका को ललकारा है। उन्होंने कहा है कि ईरान अमेरिकी जंगी जहाजों को समुद्र में दफन करने की ताकत रखता है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने स्पष्ट किया है कि यदि हमला हुआ, तो क्षेत्र में मौजूद दुश्मन की हर एक सुविधा, बेस और संपत्ति उनके निशाने पर होगी। यह बयान संकेत देता है कि ईरान इस युद्ध को केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे पूरे क्षेत्र में फैला देगा।

अतीत के जख्म और अटलांटिक काउंसिल का विश्लेषण

पिछले साल जून में 12 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और सैन्य नेतृत्व को भारी चोट पहुंचाई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस समय दावा किया था कि ईरान की शक्ति ‘खत्म’ कर दी गई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स इससे इत्तेफाक नहीं रखते। अटलांटिक काउंसिल के नेट स्वानसन का कहना है कि ईरान भले ही कमजोर हुआ हो, लेकिन वह अभी भी अमेरिका को ‘असली दर्द’ देने की क्षमता रखता है। उसकी कम दूरी की मिसाइलें कतर, सऊदी अरब और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैनिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।

खौफ में अमेरिकी साथी: अरब देशों की दोहरी नीति

इस संभावित महायुद्ध से अमेरिका के साथी देश, विशेषकर खाड़ी देश (Gulf Countries) बेहद डरे हुए हैं। इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कड़े जवाबी हमले की बात कही है, वहीं सऊदी अरब और यूएई ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी हवाई सीमा (Airspace) का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने देंगे। अरब राजनयिकों का मानना है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र को तबाह कर सकता है। वे पर्दे के पीछे से अमेरिका और ईरान दोनों को शांत करने की कोशिशों में जुटे हैं ताकि तेल की सप्लाई और क्षेत्रीय शांति बनी रहे।

Read More: Iran USA Tension: ईरान-अमेरिका युद्ध का खतरा, ट्रंप की ‘बमबारी’ वाली धमकी के बीच ईरान ने तैनात की घातक ‘खैबर’ मिसाइल

Thetarget365

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