Israel Hezbollah Conflict: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इजराइल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच करीब दो महीने पहले सीजफायर की घोषणा की गई थी। इसके बाद लेबनान के अधिकांश हिस्सों में संघर्ष की तीव्रता कम हुई, लेकिन दक्षिण लेबनान में तनाव अब भी बना हुआ है। नबातिह शहर के पास स्थित रणनीतिक अली ताहेर पहाड़ी इस समय दोनों पक्षों के बीच जारी संघर्ष का प्रमुख केंद्र बन गई है।
अली ताहेर पहाड़ी पर लगातार सैन्य कार्रवाई
पिछले कई हफ्तों से इजराइली सेना अली ताहेर पहाड़ी और इसके आसपास के इलाकों को निशाना बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में तोपों से गोलाबारी के साथ हवाई हमले भी किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ हिजबुल्लाह भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। संगठन की ओर से इजराइली सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इससे सीजफायर के बावजूद इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
शांति समझौते को लेकर बना गतिरोध
इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह युद्धविराम समझौते की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद है। अमेरिका इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसकी कोशिश है कि हिजबुल्लाह दक्षिण लेबनान के रणनीतिक इलाकों से पीछे हटे तथा संबंधित क्षेत्र लेबनानी सेना के नियंत्रण में जाएं। इसका उद्देश्य इलाके में सैन्य गतिविधियों को कम करना और भविष्य में व्यापक संघर्ष की संभावना को रोकना बताया जा रहा है।
हिजबुल्लाह ने हथियार छोड़ने से किया इनकार
जून में हुए समझौते के तहत यह व्यवस्था तय की गई थी कि हिजबुल्लाह जैसे-जैसे अपने हथियारों को हटाएगा, वैसे-वैसे इजराइली सेना भी पीछे हटेगी। हालांकि, हिजबुल्लाह ने इस व्यवस्था को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। संगठन का कहना है कि वह लितानी नदी के उत्तर में स्थित इलाकों में अपने हथियार नहीं डालेगा। अली ताहेर पहाड़ी भी इसी व्यापक क्षेत्र में आती है, इसलिए यह स्थान विवाद का अहम केंद्र बन गया है।
अमेरिका के प्लान पर भी उठे सवाल
अमेरिका की मध्यस्थता के पीछे एक व्यापक योजना बताई जा रही है, जिसका उद्देश्य हिजबुल्लाह के सैन्य नेटवर्क को कमजोर करना और उसके लड़ाकों को निरस्त्र करना है। इसके साथ ही दक्षिण लेबनान में लेबनानी सेना की भूमिका मजबूत करने की कोशिश भी की जा रही है। हालांकि, हिजबुल्लाह की असहमति ने इस प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है और जमीनी स्तर पर तनाव कम होने के बजाय संघर्ष जारी है।
इजराइल ने रणनीतिक नियंत्रण का किया दावा
इजराइली सेना ने हाल में दावा किया है कि उसने अली ताहेर पहाड़ी और उसके नीचे मौजूद हिजबुल्लाह की कथित सुरंगों के नेटवर्क पर ऑपरेशनल कंट्रोल हासिल कर लिया है। इजराइल के मुताबिक, इन सुरंगों का इस्तेमाल हिजबुल्लाह के लड़ाकों को छिपाने और हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था। इस दावे को इजराइल अपनी सैन्य कार्रवाई की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहा है।
पहाड़ी पर वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं
हालांकि, अली ताहेर पहाड़ी पर इस समय किस पक्ष का कितना नियंत्रण है, इसकी स्वतंत्र और पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है। इजराइली सेना के नियंत्रण के दावे के बावजूद इलाके में हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां जारी हैं। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में स्थिति अभी भी बेहद अस्थिर बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है।
नए युद्ध की आशंका ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अली ताहेर पहाड़ी को लेकर जारी संघर्ष जल्द नहीं रुका, तो इसका असर दक्षिण लेबनान से बाहर भी फैल सकता है। सीजफायर के बावजूद लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले व्यापक संघर्ष का रास्ता खोल सकते हैं। ऐसी स्थिति में लेबनान में एक बार फिर बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती युद्धविराम को बनाए रखने और दोनों पक्षों को किसी नए बड़े टकराव से रोकने की है।
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