Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर न केवल अपनी भव्यता के लिए, बल्कि अपने अनसुलझे रहस्यों के लिए भी विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहाँ भगवान जगन्नाथ स्वयं श्रीकृष्ण के रूप में, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को यहाँ निकलने वाली रथयात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं और रथ खींचकर पुण्य कमाते हैं। इस वर्ष यह पावन पर्व 16 जुलाई को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। हालाँकि, इस मंदिर की हर ईंट और हर सीढ़ी के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक गाथा छिपी है, जिसमें से ‘यमशिला’ का रहस्य सबसे अधिक चौंकाने वाला है।

मंदिर की तीसरी सीढ़ी है ‘यमशिला’
मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय कुल 22 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’ कहा जाता है। इनमें से तीसरी सीढ़ी को ‘यमशिला’ के नाम से जाना जाता है। जनश्रुति और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस सीढ़ी का प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि बड़े-बड़े भक्त भी इस पर पैर रखने से घबराते हैं। स्थानीय लोग और पुरी के निवासी मंदिर से बाहर निकलते समय इस सीढ़ी पर पैर रखने से विशेष रूप से बचते हैं। माना जाता है कि गलती से भी इस पर पैर पड़ जाने पर व्यक्ति के मन में भय पैदा हो जाता है और यह आध्यात्मिक रूप से अशुभ माना जाता है।

क्या है यमशिला के पीछे की पौराणिक कथा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब कलियुग में भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से ही अपने पापों से मुक्त होने लगे, तो न्याय के देवता यमराज को धर्म के संतुलन की चिंता सताने लगी। उन्हें लगा कि यदि हर कोई दर्शन कर पापों से मुक्त हो जाएगा, तो कर्मों के फल का सिद्धांत प्रभावित होगा। अपनी इसी चिंता को लेकर यमराज भगवान जगन्नाथ के पास पहुंचे। तब भगवान ने यमराज को समाधान देते हुए कहा कि वे मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर अपना स्थान ग्रहण करें। तभी से उस सीढ़ी को ‘यमशिला’ कहा जाने लगा। मान्यता है कि मंदिर से बाहर निकलते समय यदि कोई इस सीढ़ी पर पैर रखता है, तो उसे दर्शन से प्राप्त हुआ पुण्य समाप्त हो जाता है।
आध्यात्मिक प्रतीक हैं बैसी पहाचा की सीढ़ियाँ
जगन्नाथ मंदिर की ये 22 सीढ़ियाँ केवल पत्थर के सोपान नहीं हैं, बल्कि ये मनुष्य के आंतरिक विकारों का प्रतीक मानी जाती हैं। प्रत्येक सीढ़ी का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व है। इन सीढ़ियों को काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या और अन्य मानवीय दुर्गुणों का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि जब भक्त इन 22 सीढ़ियों को पार करके भगवान के गर्भगृह तक पहुँचता है, तो वह वास्तव में अपने भीतर के इन्हीं विकारों को त्याग कर प्रभु की शरण में पहुँचता है।
श्रद्धा और विज्ञान का संगम
जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्य आज भी विज्ञान और आस्था के बीच की एक कड़ी बने हुए हैं। मंदिर की ध्वजा का हवा की विपरीत दिशा में लहराना हो या ‘यमशिला’ का रहस्य, ये बातें भक्तों की आस्था को और दृढ़ करती हैं। यमशिला का महत्व केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि यह मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सचेत रहने का संदेश भी देती है। पुरी आने वाले हर श्रद्धालु के लिए इस स्थान का दर्शन करना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव होता है, जहाँ साक्षात प्रभु के चरणों में जाने से पहले भक्त को अपने कर्मों का स्मरण कराया जाता है।
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