India China Border Clash : भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए चीन को क्लीन चिट देना बंद करने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि सीमा से जुड़े घटनाक्रम पर देश के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। खरगे ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और राजनयिक जवाबदेही से जोड़ते हुए सरकार से तीन अहम सवालों के जवाब मांगे हैं।
पीएम मोदी से सच सामने रखने की मांग
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि चीन को क्लीन चिट देने की नीति बंद होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को देश के सामने सच रखना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, सीमा पर सामने आ रही खबरों के बीच सरकार की जिम्मेदारी है कि वह देश को भरोसे में ले और स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी दे। उन्होंने अपने सवालों के जरिए केंद्र सरकार की चीन नीति और सीमा प्रबंधन को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।
आईटीबीपी प्रमुख के बयान पर जताई चिंता
खरगे ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान का हवाला देते हुए अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ कथित टकराव की खबरों पर चिंता जताई। आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए थे और कुछ स्थानों पर टकराव जैसी परिस्थितियां बनी थीं। खरगे ने सवाल उठाया कि डोकलाम और गलवान के बाद क्या सीमा पर एक बार फिर ऐसा घटनाक्रम हुआ है? उन्होंने इस विषय पर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
अगस्त में चीनी घुसपैठ की खबरों का भी किया जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में अगस्त के दौरान टैक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की सामने आई खबरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थिति को लेकर सामने आ रही जानकारियां गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि, इन खबरों और घटनाओं के संबंध में आधिकारिक पुष्टि तथा विस्तृत जानकारी का सामने आना जरूरी है। खरगे ने सरकार से आग्रह किया कि वह सीमा पर होने वाली गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करे, ताकि देश के नागरिकों को वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
47 दिन बाद भी टकराव जारी रहने पर सवाल
खरगे ने वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत का जिक्र करते हुए दावा किया कि वार्ता के 47 दिन बीत जाने के बाद भी टकराव जारी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस घटनाक्रम के कारण भारतीय सेना के गश्त करने के अधिकारों पर कोई असर पड़ा है? कांग्रेस अध्यक्ष ने सीमा पर पेट्रोलिंग की स्वतंत्रता को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उनके मुताबिक, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारतीय सैनिकों की आवाजाही और निगरानी से जुड़े अधिकारों की स्थिति क्या है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनयिक जवाबदेही पर बहस
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा और चीन के साथ भारत के राजनयिक संबंधों से भी जोड़ा है। खरगे के तीन सवालों का मुख्य उद्देश्य सरकार से सीमा पर स्थिति, भारतीय गश्त के अधिकार और चीन के प्रति उसके रुख पर स्पष्टीकरण मांगना है। विपक्ष के इन आरोपों के बीच केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, सीमा पर टकराव से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों की विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है।
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