US Iran Conflict : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ हुई शांति समझौते (पीस डील) को रद्द करने के ऐलान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। बुधवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों, जिनमें चाबहार, बुशहर और बंदर अब्बास शामिल हैं, पर भीषण मिसाइल हमले किए। इन हमलों के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने एक आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिका ने ’20 के मुकाबले 1′ के अनुपात में जवाबी कार्रवाई की है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान आगे भी उकसावे की कार्रवाई करता है, तो अमेरिका हर हमले के बदले 20 गुना अधिक शक्तिशाली सैन्य हमला करेगा। यह कार्रवाई पिछले दिनों ईरानी बलों द्वारा अमेरिकी नौकाओं पर किए गए हमलों का सीधा बदला मानी जा रही है।

ईरान की घबराहट और डील करने की बेताबी
ईरान पर सैन्य दबाव और लगातार हो रही एयरस्ट्राइक के बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अब बातचीत के लिए व्याकुल है। उन्होंने कहा, “ईरान के नेतृत्व ने कुछ समय पहले ही फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया है और वे किसी भी कीमत पर समझौता (डील) करने के लिए तैयार हैं।” हालांकि, ट्रंप ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि ईरान इस समझौते का सम्मान करने के लायक है भी या नहीं। ईरान द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमलों के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने उन्हें ‘सनकी’ करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य दृष्टि से अमेरिका पहले ही जीत चुका है और ईरान के पास अब खोने के लिए बहुत कम बचा है।

स्पेन और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का सख्त रुख
अपनी विदेश नीति की चर्चा करते हुए ट्रंप ने स्पेन के साथ चल रहे मतभेदों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि स्पेन के साथ अतीत में गंभीर दिक्कतें थीं और वे आज भी बनी हुई हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि स्पेन ने अब अमेरिकी मांगों को स्वीकार करते हुए भारी भुगतान किया है, जिसके बाद ही उनसे बातचीत का रास्ता खुला है। वहीं, भविष्य की सैन्य रणनीति पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यूरोप से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का निर्णय ग्रीनलैंड की स्थिति और ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान अब मदद की पेशकश कर रहा है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है क्योंकि संघर्ष का बड़ा चरण समाप्त हो चुका है।
भारत-पाकिस्तान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा खुलासा
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़े संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय दोनों देशों के बीच युद्ध अपने चरम पर था और 11 लड़ाकू विमानों को मार गिराया गया था। ट्रंप ने कहा, “वह स्थिति एक विनाशकारी परमाणु युद्ध में तब्दील हो सकती थी, जिसमें करोड़ों लोगों की जान जा सकती थी।” उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उनके हस्तक्षेप से 3 से 5 करोड़ लोगों की जान बची है। ट्रंप ने संकेत दिया कि यह संख्या उनके अनुमान से कहीं अधिक हो सकती थी, जो उनके द्वारा निभाई गई मध्यस्थता की भूमिका की गंभीरता को दर्शाता है।












