Jolly LLB 3 Movie Review: पास हुई या फेल! अक्षय-अरशद की ‘जॉली एलएलबी 3’ हंसाने के साथ-साथ सोच में भी डालेगी

Jolly LLB 3 Movie Review:  आज के समय में हर हफ्ते नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज हो रही हैं, ऐसे में सही फिल्म चुनना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लेकिन ‘जॉली एलएलबी 3’ एक ऐसी फिल्म है जिसे सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार और खास दोस्तों के साथ भी जरूर देखना चाहिए। अक्षय कुमार और अरशद वारसी की जोड़ी एक बार फिर कोर्टरूम ड्रामा और कॉमेडी के संगम के साथ लौट आई है।

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‘जॉली एलएलबी 3’ केवल हंसाने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि यह गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। इस फिल्म में किसानों की आत्महत्या और उनकी जमीनें हथियाने जैसी ज्वलंत समस्याओं को संवेदनशील तरीके से दर्शाया गया है।

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कहानी: गंभीर मुद्दों पर हल्का-फुल्का पर्दा

फिल्म की कहानी हमें राजस्थान के बीकानेर जिले के छोटे से गांव परसौल लेकर जाती है, जहां एक अमीर और रसूखदार बिजनेसमैन हरिभाई खेतान (गजराज राव) ‘बीकानेर टू बोस्टन’ नामक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करना चाहता है। इस प्रोजेक्ट के लिए उसे गांव के किसानों की जमीनें चाहिए, लेकिन कई किसान अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

यहां से शुरू होती है जमीन और न्याय के लिए जंग। हरिभाई खेतान अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए स्थानीय नेताओं और अफसरों को भी साथ लेकर किसानों की जमीन अवैध तरीके से कब्जा कराता है। इस प्रक्रिया में एक किसान आत्महत्या कर लेता है, और उसके बाद उसकी विधवा जानकी न्याय की लड़ाई लड़ने निकल पड़ती है।

यहाँ पर आता है ‘जॉली’ यानी अक्षय कुमार का किरदार, जो जानकी की लड़ाई लड़ने के लिए अदालत में आता है। इस पूरी कहानी में कॉमेडी और गंभीरता का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है, जो दर्शकों को बांधे रखता है।

निर्देशक और कहानी कहने की खूबी

निर्देशक सुभाष कपूर ने ‘जॉली एलएलबी 3’ के जरिए फिर साबित कर दिया है कि वे सामाजिक मुद्दों को दर्शकों के लिए मनोरंजक और असरदार ढंग से पेश करने में माहिर हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन दोनों सुभाष कपूर ने ही किया है, जिनका यह तिहरा मिक्स है — कॉमेडी, इमोशन और सच्चाई।

फिल्म का एक खास डायलॉग है — “आज किसानों के लिए कानून वो लोग बना रहे हैं, जिन्हें पालक और सरसो में फर्क नहीं पता…” यह डायलॉग पूरी फिल्म की आत्मा को बयान करता है। सुभाष कपूर ने हर किरदार को उस हद तक विकसित किया है कि वे फिल्म की कहानी को मजबूती देते हैं।

‘जॉली एलएलबी 3’ सिर्फ अक्षय कुमार के इर्द-गिर्द घूमती नहीं बल्कि अरशद वारसी, सौरभ शुक्ला, गजराज राव और बाकी कलाकारों को भी खूब चमकने का मौका देती है।

कलाकारों की अदाकारी: बेमिसाल केमिस्ट्री

अक्षय कुमार ने अपने इस किरदार में वही मुस्कान और सहजता दिखाई है, जो उनकी पिछली ‘जॉली एलएलबी’ फिल्मों की पहचान रही है। वे हंसी-मज़ाक के बीच गंभीर मुद्दे को इतने सहज ढंग से पेश करते हैं कि आप भावुक होने से खुद को रोक नहीं पाते।

अरशद वारसी अपनी कॉमिक टाइमिंग और डायलॉग डिलीवरी से फिल्म में जान डाल देते हैं। उनकी ‘जॉली’ के साथ अक्षय की केमिस्ट्री स्क्रीन पर शानदार लगती है और हर सीन में दर्शकों का मनोरंजन करती है।

सीमा बिस्वास ने जानकी की भूमिका में कम डायलॉग के बावजूद अपने चेहरे के भावों से गहरी छाप छोड़ी है। उनकी आंखों में किसान की पीड़ा और हिम्मत साफ झलकती है, खासकर क्लाइमेक्स के सीन में।

गजराज राव ने नेगेटिव रोल में नया आयाम जोड़ा है। वे शांत, चालाक और खतरनाक खलनायक के रूप में पूरे आत्मविश्वास के साथ नजर आते हैं।

सौरभ शुक्ला ने जस्टिस त्रिपाठी की भूमिका में जान डाल दी है। उनकी हाजिरजवाबी और सटीक टाइमिंग कोर्टरूम ड्रामे को और भी प्रभावी बनाती है।

फिल्म की ताकत और कमजोरियां

‘जॉली एलएलबी 3’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी और दमदार अभिनय है। फिल्म किसानों के मुद्दे को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली तरीके से लाती है, लेकिन इस दौरान दर्शकों को हंसाने और भावुक करने में भी सफल रहती है।

फिल्म में कोर्टरूम ड्रामा और महिला किरदारों को थोड़ा और विस्तार दिया जा सकता था, जिससे कहानी और भी गहराई से सामने आती। परन्तु ये कमियां फिल्म की कुल गुणवत्ता को कहीं कम नहीं कर पातीं।

सामाजिक संदेश: सोचने पर मजबूर करे

यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक संदेश भी देती है। आज हम अक्सर शहरी जीवन के चकाचौंध में ये भूल जाते हैं कि देश के गांवों में किसानों की क्या स्थिति है। किसानों की जमीनें किस तरह बड़ी कंपनियों द्वारा हथियाई जा रही हैं और आत्महत्या जैसी त्रासदियां हो रही हैं।

‘जॉली एलएलबी 3’ हमें इस कड़वे सच से रूबरू कराती है, जो हमें सोचने पर मजबूर कर देता है कि अगर हम ध्यान न दें तो हमारे देश के गांव खाली होते जाएंगे और खेती-किसानी खत्म हो जाएगी।

फिल्म की कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है, जो इसे और भी असरदार बनाती है।

क्या देखें या न देखें?

अगर आप एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास भी कराए, तो ‘जॉली एलएलबी 3’ आपके लिए सही विकल्प है। यह फिल्म आपको हंसाएगी, रुलाएगी और अंत में सोचने पर मजबूर भी करेगी।

बोलते हुए न्यायालयीन नाटक और संवेदनशील सामाजिक मुद्दों के बीच संतुलन बखूबी बनाए रखने वाली यह फिल्म अपने समय की एक जरूरी फिल्म है।‘जॉली एलएलबी 3’ अक्षय कुमार और अरशद वारसी की धमाकेदार वापसी है, जिसमें सुभाष कपूर की पटकथा और निर्देशन ने इसे एक दमदार मुकाम दिया है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि हमारे समाज के लिए एक आईना है।

फिल्म की रेटिंग: 4/5 स्टार

अगर आप हंसते-हंसाते गंभीर मुद्दे पर सोचने वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो ‘जॉली एलएलबी 3’ को थिएटर में जरूर देखें।

फिल्म का नाम: जॉली एलएलबी 3
निर्देशक: सुभाष कपूर
कास्ट: अक्षय कुमार, अरशद वारसी, सौरभ शुक्ला, सीमा बिस्वास, गजराज राव
शैली: कोर्टरूम ड्रामा, कॉमेडी, सामाजिक मुद्दा
रिलीज: थिएटर

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