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Azad Hind Island: अंडमान-निकोबार का नाम ‘आजाद हिंद’ रखने की मांग, के. कविता ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

Azad Hind Island: आजाद हिंद फौज के संस्थापक और भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का नाम बदलने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। पूर्व सांसद और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर सिफारिश की है कि इस पूरे द्वीप समूह का नाम बदलकर ‘आजाद हिंद’ रखा जाना चाहिए। कविता का तर्क है कि यह कदम न केवल नेताजी के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि होगा, बल्कि उस वीर सेना के बलिदान को भी सम्मानित करेगा जिसने विदेशी धरती पर भारत की आजादी का बिगुल फूंका था।

ऐतिहासिक विरासत का सम्मान: 1943 की जीत की याद

प्रस्ताव के पक्ष में ऐतिहासिक दलीलें देते हुए के. कविता ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य आजाद हिंद की अंतरिम सरकार की विरासत को संरक्षित करना है। उन्होंने याद दिलाया कि 1943 में नेताजी के नेतृत्व में ही इन द्वीपों को ब्रिटिश औपनिवेशिक दासता से मुक्त कराया गया था। यह भारत का वह पहला भू-भाग बना था, जहां से अंग्रेजों को खदेड़कर आजादी की पहली किरण देखी गई थी। कविता के अनुसार, जिस क्षेत्र को नेताजी ने अपनी कूटनीति और पराक्रम से जापान के सहयोग से हासिल किया, उसका नाम आज भी औपनिवेशिक काल के नाम पर रहना न्यायसंगत नहीं है।

पीएम मोदी को पत्र: औपनिवेशिक सत्ता की अंतिम पहचान मिटाने का आग्रह

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजे गए अपने पत्र में कविता ने केंद्र सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में नेताजी के सम्मान में उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार ने पहले ही द्वीप समूह के तीन मुख्य द्वीपों का नाम बदला है, लेकिन पूरे द्वीप समूह का नाम अभी भी वही है जो ब्रिटिश शासन के दौरान रखा गया था। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संवैधानिक और प्रशासनिक कदम उठाए जाएं ताकि भारत के गौरवशाली इतिहास को भूगोल के नक्शे पर सही स्थान मिल सके।

नेताजी की कूटनीति और पराक्रम का उल्लेख: ‘हमने नहीं अंग्रेजों ने दिया यह नाम’

मीडिया से बात करते हुए पूर्व सांसद ने नेताजी के संघर्षों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश के बाहर जाकर अपनी कूटनीति से जापान का समर्थन हासिल किया और बलपूर्वक अंग्रेजों से अंडमान और निकोबार छीन लिया था। उन्होंने 1947 की आधिकारिक आजादी से बहुत पहले ही वहां हमारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।” कविता ने यह भी कहा कि भले ही वे भाजपा सरकार द्वारा बदले गए सभी नामों से सहमत न हों, लेकिन नेताजी एक ऐसी ऊर्जा हैं जिनका सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘अंडमान और निकोबार’ नाम अंग्रेजों की देन है, इसलिए इसे बदलकर ‘आजाद हिंद’ करना राष्ट्रीय स्मृति के लिए आवश्यक है।

मोदी सरकार के पिछले फैसले: शहीद, स्वराज और सुभाष द्वीप

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही पोर्ट ब्लेयर में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर तीन द्वीपों का नामकरण बदला था। इसके तहत ‘रॉस द्वीप’ का नाम ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप’, ‘नील द्वीप’ का नाम ‘शहीद द्वीप’ और ‘हेवलॉक द्वीप’ का नाम ‘स्वराज द्वीप’ किया गया था। अब इस नई मांग के बाद यह बहस छिड़ गई है कि क्या पूरे केंद्र शासित प्रदेश की पहचान को नेताजी के ‘आजाद हिंद’ के सपने के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

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